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Basti News: परिषदीय विद्यालयों में खेल, परीक्षा साथ-साथ, ऊहापोह में बच्चे

Thu, 09 Nov 2023 12:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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अर्धवार्षिक परीक्षा के दौरान ही जारी कर दी गई खेल समयसारिणी
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अदूरदर्शिता के चलते खेलकूद गतिविधि और परीक्षा दोनों प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। परिषदीय विद्यालयों के बच्चे इस समय ऊहापोह की स्थिति में है। उनकी अर्धवार्षिक परीक्षा और खेलकूद की गतिविधियां साथ-साथ चल रही हैं। इससे बच्चे दोहरा मार झेल रहे हैं। वह न खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले पा रहे हैं और न ही पूरे मनोयोग से परीक्षा दे पा रहे हैं। इस अव्यवस्था से अंदर ही अंदर शिक्षक भी नाराज हैं।
सभी ब्लॉकों के खंड शिक्षाधिकारियों ने सात से 10 नवंबर तक न्याय पंचायत स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता की समयसारिणी जारी की है। इसमें शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। दूसरी ओर बीएसए की ओर से जारी निर्देश में छह नवंबर से 10 नवंबर के बीच ही कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों की अर्धवार्षिक परीक्षा कराने को कहा गया है। यह दोनों आदेश विद्यालय स्तर पर शिक्षक और बच्चों दोनों के लिए मुसीबत बन गया है।
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एक तरफ बच्चों को परीक्षा देनी है तो दूसरी ओर इसी अवधि में खेलकूद में भी हिस्सा लेना है। ऐसे में दोनों आयोजनों में एक साथ प्रतिभागिता समझ से परे है। खेलकूद में रूचि रखने वाले कुछ बच्चे अर्धवार्षिक परीक्षा से तौबा भी कर रहे हैं तो कुछ को खेलकूद से वंचित होना पड़ रहा है। जिम्मेदार एक ही समय दो कार्यक्रम की समयसारिणी जारी कर किनारे हो गए हैं। इसकी जवाबदेही अब शिक्षकों पर तय हो रही है।
शिक्षक भी अंदर ही अंदर अफसरों के इस उलझाने वाले आदेश को लेकर नाराज है। एक शिक्षक ने कहा कि जिम्मेदारों को इतना भी नहीं मालूम कि एक साथ परीक्षा और खेल कैसे हो सकता है। ऐसे आदेश का मतलब सिर्फ खानापूर्ति है। किसी भी कार्यक्रम के फ्लाप होने पर शिक्षकों को जिम्मेदार जवाबदेह बनाएंगे। जबकि उनका कोई दोष नहीं है।
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फ्लाप हो रही खेलकूद प्रतियोगिता
अर्धवार्षिक परीक्षा के चलते परिषदीय बच्चों के बीच होने वाली न्याय पंचायत स्तर की खेलकूद प्रतियोगिता फ्लाप होती नजर आ रही है। अधिकतर बच्चे परीक्षा में शामिल होने के चलते इसमें हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं। वहीं विभाग खेलकूद प्रतियोगिता पर न्याय पंचायतवार सरकारी धन को पानी की तरह खर्च कर रहा है।
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गिनती के बच्चों का होगा चयन
न्याय पंचायत स्तर की खेलकूद प्रतियोगिता रस्म अदायगी बनकर रह गई है। परीक्षा के दौरान यह आयोजन सिर्फ खानापूर्ति के लिए किया जा रहा है। जानकारों की मानें तो खेलकूद गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चिह्नित कर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जाएगी। जबकि इस आयोजन का मकसद अधिक से अधिक बच्चों को इससे जोड़ना है। यह तभी संभव है जब पृथक समय में इसका आयोजन हो।
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कोट
यदि परीक्षा और खेलकूद प्रतियोगिता एक ही समय में कराई जा रही है तो यह सरासर गलत है। बीएसए से पूछताछ की जाएगी। क्योंकि खेलने वाले विद्यार्थी के लिए भी परीक्षा देना अनिवार्य है। दोनों आयोजनों की तिथियां अलग-अलग होनी चाहिए।
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-संजय कुमार शुक्ल, सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक
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विभाग की अक्षमता की देन है कि एक साथ दो-दो आयोजन करा दिए गए। इससे शिक्षक और बच्चे दोनों पीड़ित हैं। साधारण सी बात है कि खेलकूद प्रतियोगिता और परीक्षा एक साथ नहीं हो सकती हैं, लेकिन जिम्मेदारों को कौन समझाए जब वह कुछ सुनने को तैयार नहीं हैं।
-उदय शंकर शुक्ल, अध्यक्ष, उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ, बस्ती
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