बनकटी। जिम्मेदारों की उपेक्षा के चलते प्रदेश सरकार की गोवंश संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं दम तोड़ दे रही हैं। बनकटी ब्लाॅक के आश्रय स्थलों में कहीं पर अधूरा निर्माण है तो कहीं दीवारें टूट गई हैं। ऐसे में पशु आसपास के खेतों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
मनरेगा योजना से वर्ष 2019 में विकास खंड के चार ग्राम पंचायतों में अस्थाई गो-आश्रय स्थल का निर्माण कराकर उन्हें संचालित किया गया था। गो-आश्रय स्थल में बेसहारा पशुओं को रखा भी गया, पर धीरे-धीरे बदइंतजामी के चलते एक-एक कर गो-आश्रय स्थल बंद होते गए। जानकारी के अनुसार, विकास खंड के सोभनपार, मखदूमपुर व वृहद गो-आश्रय सिरौता में संचालित है। उसके बाद घुघसा, बाघापार आदि गांवों में लाखों रुपये खर्च करके छुट्टा जानवरों को संरक्षित करने के लिए निर्माण कराए गए। लेकिन लापरवाही व बदइंतजामी के चलते अस्थाई गो-आश्रय खरका में बंद हो गया तथा बाघापार में करीब तीन वर्ष पहले बंद हो गया था। घुघसा, मोहनाखोर में करीब दो वर्षों से वृहद गो-आश्रय स्थल निर्माणाधीन है। वहीं भैंसा पांडेय, कड़सरी में भी एक वर्ष से निर्माण चल रहा है। छुट्टा पशु सड़कों पर धमाचौकड़ी व किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
क्षेत्र के कनेहटी गांव निवासी मकोरे शुक्ला, भरवलिया गांव निवासी कमल किशोर पाल, घनश्याम पाल आदि ने बताया कि छुट्टा पशुओं के चलते बरसीम, गेहूं की फसल छुट्टा जानवर चौपट कर रहे हैं। गो-आश्रय का कोई मतलब नहीं है। कुदरहा के अजमतपुर में बने आश्रय स्थल से पशु बाहर निकल कर फसल को चट ले रहे हैं ।
खंड विकास अधिकारी भवानी प्रसाद शुक्ल ने बताया कि निर्माणाधीन भवन जल्दी ही शुरू कर संचालित कर दिया जाएगा। छुट्टा पशुओं के लिए बृहद गो-आश्रय प्रर्याप्त हैं। कहीं घूमते हुए मिले तो फोन करें पकड़वा कर संरक्षित कर दिया जाएगा।