संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। हवा में प्रदूषण फिर नहीं बचा पाएंगे। दीपावली की खुशियों के बीच चिंताजनक संदेश भी है। जिले भर में करीब डेढ़ सौ क्विंटल बारूद से तैयार पटाखे उपलब्ध हैं।
धनतेरस से ही घरों के छतों एवं खुले मैदानों में आतिशबाजी शुरू हो जाएगी। पटाखे का शोर और धुआं वशिष्ठ नगरी में वायु प्रदूषण के हालात और बदतर कर देगा। ऐसे में शहरवासियों को सजग रहने की जरूरत है। कोशिश यही हो कि दिवाली और अन्य त्योहारों पर उन्हीं पटाखों का इस्तेमाल हो, जिससे प्रदूषण कम से कम हो।
प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, पटाखे बेचने के लिए 22 स्थायी लाइसेंसी पंजीकृत हैं। इसके अलावा 250 अस्थायी लाइसेंस जारी किए गए हैं।
इसमें सदर तहसील में 95, रुधौली में 40, भानपुर में 60 और हर्रैया तहसील क्षेत्र के 55 अस्थायी लाइसेंसी शामिल हैं। स्थायी लाइसेंसियों को 45 किलो बारूद और अस्थायी लाइसेंसियों को 15 किलोग्राम बारूद रखने की अनुमति है। मगर, सभी ने मनमाने ढंग से अनुमति से ज्यादा स्टॉक जमा कर रखा है। औसतन 50- 60 किलो बारूद प्रत्येक दुकानदार के पास मौजूद है। इस तरह से बाजार में डेढ़ सौ क्विंटल बारूद के पटाखे बिकने के लिए रखे गए हैं।
जानकारों के अनुसार, इससे भी ज्यादा बारूद शहर के कई इलाकों में मौजूद अवैध दुकानों में है। इसके अलावा गोदाम भी हैं, जहां से पटाखे बेचे जाते हैं। अब बारूद की कुल खरीद कीमत देखें तो ढाई से तीन करोड़ रुपये हैं।
व्यापारी बताते हैं कि पटाखे में तीन से चार गुना की बचत है। अगर सभी पटाखे बिके तो दिवाली के जश्न में 10 करोड़ रुपये हवा में धुआं बनकर उड़ जाएंगे और शोर के साथ वायुमंडल में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ना तय है।
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