बस्ती। प्रदूषण पर अंकुश के लिए कम पटाखे जलाने की सीख धरी की धरी रह गई। शाम होते ही आसमान सतरंगी रॉकेट से पट गया। गली-मोहल्लों में रंग-बिरंगी फुलझड़ियां जलाई जाने लगीं। पटाखे जलाने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।
अनुमान के मुताबिक शनिवार से लेकर सोमवार के तीन दिन के बीच 20 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के पटाखे जला दिए गए। करीब तीन सौ क्विंटल बारूद का धुआं हवाओं में घुल चुका है। इस वजह से सोमवार को सुबह सांस के रोगियों को दिक्कत महसूस हुई। शहर का एक्यूआई 145 से बढ़कर 177 पर पहुंच गया।
शहर में धूल के कण और वाहनों से निकले धुएं से दशहरा के बाद से ही प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है। लगातार 100 के आसपास रहने वाला एक्यूआई का स्तर 140 के पार तक पहुंचा हुआ था, लेकिन शुक्रवार से इसमें इजाफा होने लगा। शनिवार को 142 और रविवार की आधीरात के बाद 160 पहुंच गया। सोमवार को 177 प्वाइंट पर जा पहुंचा। जानकार बताते हैं कि पिछले चार वर्षों में एयर क्वालिटी इंडेक्स इतने ऊपर कभी नहीं पहुंचा था। 2019 में 165 तक एक्यूआई पहुंचा था।
शिवहर्ष किसान पीजी काॅलेज के पूर्व प्राचार्य डाॅ. जेपी शुक्ल बताते हैं कि बारूद के द्वारा पर्यावरण में सूक्ष्म कणों की मात्रा ज्यादा हो जाती है और हानिकारक प्रदूषक जैसे की नाइट्रेट्स, सल्फर ऑक्साइड्स, क्लोराइड्स, अमोनिया के जल में घुलनशील आयन उत्पन्न होते है। साथ ही विभिन्न धातु जैसे की मैग्नीशियम, क्रोमियम, कैल्शियम, बेरियम जो की कैंसर जैसे रोगों के कारण होते है ये भी हानिकारक मात्रा में बढ़ जाती है। जल में घुलन शील होने के कारण इनका दीर्घ काल तक प्रभाव बना रहता है। अतिरिक्त मात्रा में कार्बन ब्लैक के उत्सर्जन से अस्थमा जैसे रोग के कारक बनते है।
गांव-गांव तक फैली बारूद की गंध : जिले में पटाखे बेचने के लिए 22 स्थायी लाइसेंसी पंजीकृत हैं। इसके अलावा 250 अस्थायी लाइसेंस जारी किए गए थे। इनमेंं सदर तहसील में 95, रुधौली में 40, भानपुर में 60 और हर्रैया तहसील क्षेत्र के 55 अस्थायी लाइसेंसी शामिल हैं। स्थायी लाइसेंसियों को 45 किलो बारूद और अस्थायी लाइसेंसधारकों को 15 किलोग्राम बारूद रखने की अनुमति थी। मगर, सभी ने मनमाने ढंग से अनुमति से ज्यादा स्टॉक जमा कर रखा हाो। इसके अलावा 100 से अधिक अवैध दुकानों पर पटाखे बिकते देखे गए। थोक में इतने बारूद की करीब 7 करोड़ रुपये है। व्यापारी बताते हैं कि तीन से चार गुना की बचत है, यानी पटाखों की कीमत 20 करोड़ रुपये पहुंच जाएगी।
देरशाम तक होती रहीह पटाखों की बिक्री- संवाद