बस्ती। एसआईआर प्रक्रिया अभी लंबे समय तक चलाए जाने की उम्मीद है। जानकारों का कहना है कि चुनाव आयोग के मानक पर मतदाताओं काे सही ठहराने के लिए सरकारी मशीनरी को अभी बहुत कसरत करनी पड़ेगी। साॅफ्टवेयर त्रुटियां पकड़ रहा और घूम फिर कर इसका पूरा दारोमदार बीएलओ पर आ रहा है। अब वह नोटिस लिए दरवाजे-दरवाजे भटकने पर विवश है। उधर लाचार मतदाता पोर्टल पर मिस मैच न होने वाला प्रपत्र नहीं प्रस्तुत कर पा रहे हैं।
प्रथम चरण की एसआईआर सूची से चुनाव आयोग संतुष्ट नहीं है। प्रशासनिक स्तर पर वर्ष 2025 की मतदाता सूची में शामिल 19 लाख 430 मतदाताओं में से एएसडीडी श्रेणी में पाए गए 2,98,287 मतदाताओं को हटा दिया गया है। कुल 16,2,143 मतदाता ही डिजिटलाइज्ड किए गए। आयोग के साॅफ्टवेयर ने इसमें भी 4,18,153 मतदाताओं पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर दिया। इसमें 1,13,533 मतदाता ऐसे पाए गए जिनकी वर्ष 2003 की सूची से मैपिंग नहीं है। इसके अलावा 3,04,620 मतदाताओं का डाटा मिच मैच होने से सवालों के घेरे में हो गए।
जानकारों का कहना है कि दोबारा मैपिंग और मैचिंग दोनों प्रक्रिया काफी कठिन हो गई है। क्योंकि आयोग के पास उपलब्ध पुरानी मतदाता सूची पहले ही तमाम त्रुटियां हैं। लोगों के नाम या पिता के नाम सही अंकित नहीं है। जबकि मैचिंग कराते समय दिए जा रहे आधार, परिवार रजिस्टर की नकल जैसे साक्ष्यों में नाम-पिता का नाम पूरा अंकित है। ऐसे में एक अक्षर या नंबर भी गलत होने पर साॅफ्टवेयर आवेदन अस्वीकार कर दे रहा है। इससे बीएलओ और मतदाता दोनों की उलझन बढ़ी हुई है।
कुछ बीएलओ खुद यह कहते सुने जा रहे हैं इन मतदाताओं की मैपिंग और मैचिंग का कार्य निर्धारित अवधि में पूरा करना संभव नहीं दिख रहा है। इसलिए यह मामला अभी और लंबा खिचेंगा। तर्क यह भी दिए जा रहे हैं कि जब तक आयोग के पास उपलब्ध मतदाता सूची में त्रुटियां नहीं दूर होंगी तब साॅफ्टवेयर साक्ष्यों में प्रस्तुत प्रमाण पत्रों का सही ढंग से मिलान नहीं कर पाएगा।
मतदाता बनने के लिए दिल्ली-मुंबई से पहुंचे लोग : एसआईआर प्रक्रिया के तहत अपडेट सूची में नाम शामिल कराने के लिए तमाम लोग दिल्ली मुंबई से चले आए हैं। शहर के बभनगांवा निवासी राम बहादुर का कहना है कि उनका परिवार दिल्ली में रहता है। मूल रूप से वह बस्ती के रहने वाले हैं। आधार में बेटे का नाम कमलेश कुमार है। मतदाता सूची में केवल कमलेश है। ऐसे में साक्ष्य देने के बाद भी आवेदन अस्वीकार हो जा रहा है। वहीं बीएलओ स्तर से बस्ती के पते पर आधार या निवास की मांग की जा रही है। जबकि उनका आधार दिल्ली के पते पर बना है। इस समस्या का स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है। इसी तरह गांवों में भी तमाम मतदाता दिल्ली-मुंबई से आकर यहां बूथ-बूथ भटक रहे हैं।