बस्ती। परिवहन विभाग बदइंतजामी एवं अनियमितताओं की दौर से उबर नहीं पा रहा है। शहर के आईटीआई परिसर में संचालित ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (डीटीई) सिर्फ दिखावे के लिए हैं। यह सिर्फ ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन फिटनेस बनवाने का एक मिनी कार्यालय बनकर रह गया है। यहां करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए ऑटोमेटिक ड्राइविंग परीक्षण ट्रैक और सिम्युलेटर मशीन दो साल से उपयोग में नहीं लाई जा रही है। जानकार बता रहे हैं इसके पीछे जिम्मेदारों की गहरी साजिश है। यदि यह व्यवस्था बहाल हुई तो अवैध कमाई भी बंद हो जाएगी।
बता दें कि डीटीई सेंटर का टेंडर शासन स्तर से दो साल पहले ही मारुति कंपनी के सहयोगी फर्म के नाम हो चुका है। इसके बाद परिसर में एलएमवी के लिए ऑटोमेटिक सेंसर युक्त ट्रैक और भारी वाहन के लाइसेंस परीक्षण के लिए सिम्युलेटर मशीन की स्थापना भी कराई गई है। मगर यह सब शोपीस बना हुआ है। टेंडर प्राप्त करने वाली कंपनी दो साल से इस सिस्टम को संचालित करने के लिए कर्मचारी ही नहीं नियुक्त कर पाई है।