बस्ती। इच्छाशक्ति और कुछ नया करने का जज्बा हो तो मुश्किलें भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। साऊंघाट विकास क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय बटेला की शिक्षिका श्रुति त्रिपाठी ने इसे साबित किया है। सड़क हादसे के बाद बोलने में परेशानी हुई तो उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के लिए कठपुतली विधा को माध्यम बनाया। रोचक अंदाज में पढ़ाई शुरू की तो बच्चों की रुचि बढ़ी और यह नवाचार उनकी पहचान बन गया।
उनके इसी योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2019 में उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से वूमेन आइकन का खिताब भी मिला। आवास विकास कॉलोनी की रहने वाली श्रुति त्रिपाठी की पहली नियुक्ति 21 सितंबर 2015 को बनकटी विकास क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय बेलसुही में हुई थी। 26 अक्तूबर 2015 को स्थानांतरण के बाद उनकी तैनाती पूर्व माध्यमिक विद्यालय बटेला में हुई। उस समय विद्यालय में नामांकन के सापेक्ष बच्चों की उपस्थिति बेहद कम थी।
उन्होंने लगातार प्रयास कर बच्चों और अभिभावकों को विद्यालय से जोड़ा। इसके बाद न केवल उपस्थिति बढ़ी, बल्कि विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर में भी सुधार हुआ। वर्ष 2016 में श्रुति एक भीषण सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गईं। करीब दो वर्षों तक स्वास्थ्य सुधार के लिए संघर्ष करना पड़ा। इस दौरान उन्हें कई बार प्लास्टिक सर्जरी करानी पड़ी। चलने-फिरने में सहज होने के बाद भी उनकी आवाज स्पष्ट नहीं थी। ऐसे में कक्षा में सामान्य तरीके से पढ़ाना चुनौती बन गया।
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कठपुतली बनी शिक्षण का माध्यम
हार मानने के बजाय उन्होंने कठपुतली के जरिए बच्चों को पढ़ाने का प्रयोग शुरू किया। हल्की और अस्पष्ट आवाज के बावजूद कठपुतली के पात्रों के माध्यम से वह विषयों को रोचक तरीके से समझाने लगीं। इसका बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा और वे पढ़ाई में अधिक रुचि लेने लगे। धीरे-धीरे उनकी आवाज में भी सुधार हुआ। श्रुति ने विद्यालय में बच्चों के ज्ञान और रचनात्मकता को बढ़ाने के लिए सुंदर पुस्तकालय और कंप्यूटर की सुविधा विकसित कराई। स्वास्थ्य और शारीरिक विकास के लिए क्रीड़ा कक्ष भी तैयार कराया। विद्यालय परिसर में अडूसा, चिरैता, नीम, सहजन, पारिजात, तुलसी और सदाबहार समेत औषधीय गुणों वाले पौधे लगाए गए हैं।
कला और हुनर को बनाया शिक्षा का हिस्सा,
वह विद्यार्थियों को रंगोली, फ्लोर पेंटिंग, राखी, मेहंदी, कंगन निर्माण, कठपुतली, पोस्टर और शैक्षिक मॉडल बनाने का प्रशिक्षण भी देती हैं। उनकी आवाज में शिक्षक प्रशिक्षण मॉड्यूल दीक्षा एप पर भी उपलब्ध है। उनके मार्गदर्शन में विद्यालय के विद्यार्थी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भी स्थान बना चुके हैं। बच्चों को नवाचार आधारित शिक्षा देने के लिए श्रुति त्रिपाठी को कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मान मिल चुके हैं। संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से कठपुतली के माध्यम से भारतीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में किए गए कार्यों के लिए वर्ष 2019 में उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से वूमेन आइकन का खिताब मिला। आईआईटी पटना के महानिदेशक की ओर से उन्हें सरस्वती सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। आज कठपुतली के माध्यम से शिक्षण उनकी पहचान बन चुका है। उनके प्रयासों ने न केवल बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा की, बल्कि विद्यालय के शैक्षिक वातावरण को भी नई दिशा दी है।