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पल्स पोलियो अभियान को झटका

Sun, 25 Sep 2016 10:54 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
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हरैया सीएचसी पर आशाबहुओं ने किया प्रर्दशन।
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आशा, आंगनबाड़ी और संगिनी, सहायिका आंदोलन से टीकाकरण ही नहीं पल्स पोलियो अभियान को भी झटका लगा है। बूथ बनाए गए प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक सुबह से पल्स पोलियो टीम का इंतजार करते रहे लेकिन दोपहर तक किसी के नहीं पहुंचने से घर वापस लौट गए।
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शनिवार रात में ही आशा कर्मियों ने आंदोलन की उग्रता का संकेत दे दिया था। सीएमओ कार्यालय, सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर आशाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। वैक्सीन कक्ष में ताला लगा दिया। आशा कार्यकर्ता कल्याण संघ का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन बंद नहीं किया जाएगा। टीकाकरण, पल्स पोलियो कार्यक्रम का बहिष्कार किया जाएगा। जिले के 14 स्वास्थ्य केंद्रों पर आशा और संगिनी का प्रदर्शन जारी है।  गायघाट प्रतिनिधि के मुताबिक कुदरहा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कोरमा सहित दर्जनों पोलियो बूथों पर वैक्सीन बॉक्स नहीं आने से अध्यापक घर लौट गए।  शिक्षक सुबह से ही पोलियो उन्मूलन कार्य क्रम के टीकाकरण के लिए सुबह से ही स्कूलों में पहुंच गए। दोपहर डेढ़ बजे तक पोलियो बॉक्स नहीं पहुंचने से स्कूल बंद करना पड़ा।

सल्टौआ में भी स्वास्थ्य विभाग  की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई। ब्लॉक क्षेत्र में पल्स पोलियो के 110  बूथ बनाए गए थे जिसके लिए 330 कर्मचारियों  की ड्यूटी लगाई गई थी। आशा संघ ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि मांगें नही  मानी गईं तो पोलियो व टीकाकरण का बहिष्कार करेंगे। 10 हजार बच्चे पोलियो की  खुराक से वंचित रह गए। ब्लॉक क्षेत्र में 32 हजार बच्चों को पोलियो  की खुराक पिलाने का लक्ष्य है। आशा संघ की ब्लॉक अध्यक्ष संतोला यादव तथा  आंगनबाड़ी ब्लॉक अध्यक्ष सरोज शुक्ला ने बताया कि जब तक हम लोगों की  मांगें पूरी नहीं होगी तब तक धरना जारी रहेगा। 
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भानपुर में दो दिन पहले सीएचसी के वैक्सीन रूम में ताला जड़कर पहरें पर बैठ गई थी।


रविवार शाम तक सीएचसी के बाहर रखवाली करती रहीं। पोलियो की दवा सीएचसी तक पहुंच ही  हीं पाई। दोपहर बाद सीएचसी पहुंची कांग्रेसी  नेता व पूर्व ब्लाक प्रमुख रामनगर मीना पंण्डेय ने आशाओं से मुलाकात कर  उनकी पीड़ा सुनी कहा उनकी मांग जायज है। बनकटी  में भी बूथ पर सन्नाटा रहा। एक भी बच्चे बूथों पर नहीं मिले। आईओ बनकटी भगवान दास ने बताया कि क्षेत्र  में 100 बूथ बनाए गए थे। एक बूथ पर पर तीन कर्मचारी, एएनएम, आशा, प्राइवेट वर्कर लगाए  जाते हैं लेकिन आशाओं के बहिष्कार करने के कारण अभियान बंद रहा ऐसा पहली  बार हुआ है।
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