- रात 1.06 बजे से 2.22 मिनट तक रहेगा ग्रहण
- शरद पूर्णिमा की रात छत पर खीर रखकर सुबह खाने की परंपरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शनिवार को पड़ रही शरद पूर्णिमा के चंद्रमा पर इस बार ग्रहण का साया रहेगा। चंद्रमा रात 1.06 बजे से 2.22 मिनट तक ग्रहण के प्रभाव में रहेंगे। इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण के नौ घंटे पहले शुरू हो जाएगा। इस तरह से शनिवार को शाम 4 बजकर 44 मिनट से सूतक लग जाएगा जो ग्रहण की समाप्ति तक चलेगा। इस वजह से विद्वानों ने इस बार रात में छत पर खीर न रखने की सलाह दी है। क्योंकि ग्रहण से पहले के बने खाद्य पदार्थ का ग्रहण के बाद खाने की मनाही है।
ज्योतिषाचार्य देवस्य मिश्र के मुताबिक वैदिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा से अमृत बरसता है। इसलिए उस रात खीर बनाकर छत पर रख दिया जाता है। माना जाता है कि चंद्रमा से बरसने वाले अमृत का अंश और कई औषधीय गुण उसमें आ जाता है। इसलिए सुबह प्रसाद के तौर पर पूरे परिवार को खिलाए जाने की परंपरा है। मगर इस बार ऐसा नहीं हो पाएगा। खगोलशास्त्रियों का मानना है कि ग्रहण के समय पकाकर रखी हुई खाने-पीने की वस्तुओं पर वैक्टीरिया का प्रभाव सबसे ज्यादा होता है। इसलिए शास्त्रों में भी ग्रहण के पहले पकाकर रखा हुआ भोजन ग्रहण के बाद न खाने का विधान बताया गया है।
शरद पूर्णिमा पर देवी लक्ष्मी पूजा का महत्व
- शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा पर देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा-आराधना का महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को देवी लक्ष्मी घर-घर जाकर यह देखती हैं कि कौन जाग रहा है। ऐसे में रात भर जागकर पूजा-पाठ और मंत्रों का जाप करना चाहिए। शरद पूर्णिमा पर ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नम: के मंत्रों का जाप करें।
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साल के आखिरी चंद्र ग्रहण की खास बातें
- साल 2023 का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अक्तूबर 2023 को है।
- भारत में इस चंद्र ग्रहण को देखा जा सकेगा।
- चंद्र ग्रहण रात 01 बजकर 06 मिनट पर शुरू होकर 02 बजकर 22 मिनट पर खत्म होगा।
- देश में चंद्र ग्रहण दिखाई देगा इस कारण से इसका सूतक काल मान्य होगा।
- चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन, सिलाई बुनाई, पूजा-पाठ करने की मनाही।
- घर में बैठकर आप भगवान के मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं।