संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आर्य समाज नई बाजार मे स्वामी दयानन्द विद्यालय सुरतीहट्टा में वीर बंदा बैरागी की 353 वीं जयंती मनाई गई। बच्चों को उनके जीवन चरित्र के बारे योग शिक्षक गरुण ध्वज पांडेय ने बताया। उन्होंने कहा कि बंदा बैरागी ने युवावस्था में शिकार खेलते समय उन्होंने एक गर्भवती हिरणी पर तीर चला दिया। इससे उसके पेट से एक शिशु निकला और तड़पकर वहीं मर गया। यह देखकर उनका मन खिन्न हो गया।
उन्होंने अपना नाम माधोदास रख लिया और घर छोड़कर तीर्थयात्रा पर चल दिए। अनेक साधुओं से योग साधना सीखी और फिर नान्देड़ में कुटिया बनाकर रहने लगे। इसी दौरान गुरु गोबिंदसिंह जी माधोदास की कुटिया में आए। उनके चारों पुत्र बलिदान हो चुके थे। उन्होंने इस कठिन समय में माधोदास से वैराग्य छोड़कर देश में व्याप्त आतंक से जूझने को कहा। इस भेंट से माधोदास का जीवन बदल गया। गुरुजी ने उसे बंदा बहादुर नाम दिया। फिर पांच तीर, एक निशान साहिब, एक नगाड़ा और एक हुक्मनामा देकर दोनों छोटे पुत्रों को दीवार में चिनवाने वाले सरहिंद के नवाब से बदला लेने को कहा।