दी सीएमएस में कला दिखाते आर्यवीर दल के बच्चे
बस्ती। सिटी मांटेसरी स्कूल में आयोजित आर्य वीर दल के चरित्र निर्माण शिविर में शुक्रवार को प्रशिक्षकों ने आर्य वीरों को आत्मरक्षा के लिए जूडो, लाठी-दण्ड एवं बैठकों का प्रशिक्षण दिया। बच्चों को पिरामिड व स्तूप निर्माण के साथ साथ शीर्षासन, हलासन, मकरासन, भुजंगासन, वज्रासन, सुप्तवज्रासन, दण्डासन, शलभासन, वक्रासन, मयूरासन का विधिवत अभ्यास कराया। आर्य समाज नई बाजार के प्रधान ओम प्रकाश आर्य ने कहा कि आर्य वीर हमेशा राष्ट्रपोषक होता है। उसका जीवन राष्ट्र के लिए ही समर्पित होता है। आर्यवीर दल अपने पुरुषार्थ से देश का अभाव, अन्याय और अंधकार को दूर करता है।
बौद्धिक सत्र में ओम प्रकाश आर्य नेकहा कि शाकाहारी व्यक्ति पूरा जीवन शाकाहारी रह सकता है पर मांसाहारी व्यक्ति बिना शाकाहार के मांसाहार भी नहीं कर सकता। शाकाहार सात्विक विचार को जन्म देता है जबकि मांसाहार से दुर्विचार आते हैं। प्रशिक्षक विनय आर्य ने कहा कि आर्य संस्कृति का मूल वेद है, इसलिए इसे वैदिक संस्कृति भी कहा जाता है। वैदिक संस्कृति ही वरण करने योग्य है। उन्होंने सात्विक भोजन, संयम, प्राणायाम, सुबह जागरण, सत्संग, स्वध्याय, प्रसन्नता एवं जप को बुद्धि विकास का साधन बताया।
देवव्रत आर्य ने ईश्वर स्तुति, प्रार्थना व उपासना को रेखांकित किया। यज्ञ को ही जीवन का आधार बताते हुए कहा कि यज्ञ से सभी उत्तम फल प्राप्त होते हैं। प्रशिक्षक मनीष आर्य ने बच्चों को वैदिक गणित के सूत्र बताते हुए कठिन से कठिन गणना भी आसानी से करने की जानकारी दी।यज्ञ के पश्चात वेद कुमार आर्य ने बच्चों को बताया कि उन्हेंं यह बात अपने मन में बैठा लेनी चाहिए कि उनका जन्म जीतने और सफल होने के लिए ही हुआ है। इसलिए मन को सदगुणों से भरते रहना चाहिए।
द्वितीय बौद्धिक सत्र में आचार्य देवव्रत आर्य ने कहा कि जीवन को उन्नत बनाने के लिए शारीरिक, आत्मिक एवं सामाजिक रूप से सबल होना चाहिए। यह सबलता चरित्र निर्माण शिविरों से ही मिल सकती है। कहा कि कि वर्तमान में पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। इसका निदान पौधरोपण एवं गो-पालन ही है जिसके माध्यम से हमें शुद्ध प्राणवायु व विषमुक्त आहार मिल सकता है।