संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आपके जिस मोबाइल का नंबर बैंक खाते से लिंक है, उसे रुपये से ज्यादा सहेजकर रखिएगा। कारण यह कि साइबर अपराधियों ने धोखाधड़ी का नया तरीका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
साइबर अपराधी खोये हुए मोबाइल से खाते से रुपये निकाल रहे हैं। ऐसे शातिर भीड़भाड़ वाले स्थानों पर घूमकर पहले मोबाइल की चोरी करते या कराते हैं। फिर उसके जरिये खाते से रुपये निकाल रहे हैं। जिले में एक माह के भीतर ऐसी तीन मामले सामने आ चुकी हैं।
साइबर थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर विकास यादव बताते हैं कि साइबर अपराधी मोबाइल पाते ही नंबर के जरिये यूपीआई से अपना पिन बदलने की रिक्वेस्ट करते हैं। सत्यापन के लिए वह आधार नंबर मांगता है, इसलिए वे आधार भी डाउनलोड कर लेते हैं। चूंकि सारे ओटीपी उसी नंबर पर आते हैं, जो आधार या बैंक खाते से लिंक होते हैं और वह नंबर साइबर अपराधी के हाथ में होता है।
इसलिए ओटीपी भी उसी नंबर पर आते हंै। ओटीपी बताने के बाद गूगल-पे, फोन-पे आदि का पिन नंबर दूसरा बनाकर रुपये निकाल लेते हैं। वे डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भी खरीदारी कर लेते हैं। कबाड़ में न बेचें मोबाइल ः पुराने मोबाइल के डाटा को रिकवर कर उसका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी अथवा ब्लैकमेलिंग के लिए किया जा सकता है।
यदि आपके द्वारा दिए गए फोन से साइबर ठगी की गई तो पुलिस आपके ही घर तक पहुंच सकती है। ऐसे में फोन के खोने की सूचना तत्काल संबंधित थाने पर देने व मोबाइल फोन को किसी अन्य को न देने की अपील पुलिस आमजन से करती रहती है।ट