बढ़ने लगा सरयू का जलस्तर, चिंतित हुए किसान
दुबौलिया। मानसून से पहले हुई बारिश से सरयू नदी का जलस्तर में वृद्धि होने लगी है। हालांकि यह वृद्धि अभी मामूली मानी जा रही थी, लेकिन बुधवार को सुबह से लेकर शाम चार बजे करीब अस्सी मिलीमीटर की बढ़ोतरी ने किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरों को गाढ़ा कर दिया है।
केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार, बुधवार की सुबह दस बजे सरयू का जलस्तर 90.010 मीटर था तो शाम चार बजे 90.090 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में करीब अस्सी मिलीमीटर यानी आठ सेंटीमीटर की वृद्धि छह घंटे में रिकॉर्ड की गई। जबकि नदी के खतरे का निशान 92.730 मीटर है। गौरतलब है कि सरयू नदी के माझा में मौसमी फल और सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। जब अप्रैल में सिवान खाली दिखाई पड़ते हैं, तब नदी के किनारे हरियाली से गुलजार रहते हैं।
नदी की रेत पर फैली तरबूज, खरबूज, ककड़ी और परवल की बेलाएं लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। सेहत का सोना उगाने वाले किसान चक्रवाती बारिश के बाद से ही काफी परेशान हैं और जलस्तर में वृद्धि के रुख ने उन्हें परेशान कर दिया है। उन्हें चिंता है कि इस बार मानसून भी अच्छा रहने के आसार हैं और ऐसे में समय से पहले बाढ़ आई तो फसल नदी की चपेट में आ जाएगी।
माझा क्षेत्र के किसान मार्च में नदी की रेत में खेती की तैयारी शुरू कर देते हैं। आधे अप्रैल से ही उनके उत्पाद बाजार में आने शुरू हो जाते हैं। किसान रामचंद्र राजभर बताते हैं कि नाव के सहारे नदी पारकर खेतों में जाना पड़ता है। जंगली जानवरों और छुट्टा मवेशियों से फसलें बचाने के लिए खेत में मचान डालकर निगरानी करनी पड़ती है। किसान मुन्नर बताते हैं कि लॉकडाउन और कारोना कर्फ्यू के चलते खपत कम हो गई। सब्जियों, फलों के सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं। राम बुझारत, पुजारी, बाबूराम, जोखू आदि ने बताया कि तरबूज व खरबूज की खेती में मेहनत अधिक करनी पड़ती है। कोरोना संक्रमण काल में लागत तक मुश्किल से निकल पा रही है। ऊपर से नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे ही चलता रहा तो सैकड़ों बीघा फल, सब्जियां पानी में समा जाएंगी।