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सरयू नदी खतरे के निशान से पार, सुविखा बाबू गांव मैरूंड

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सरयू नदी खतरे के निशान से पार
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सुविखा बाबू गांव में ग्रामीणों के लिए प्रशासन ने लगाई तीन नाव
कई परिवारों ने तटबंध पर डाला डेरा, पशुओं के चारे का संकट बढ़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
दुबौलिया/बस्ती। मानसून सीजन में पहली बार सरयू नदी का जलस्तर शुक्रवार को खतरे के निशान पार कर गया। नदी इस समय खतरे के निशान 92.730 मीटर से छह सेंटीमीटर ऊपर 92.790 मीटर पर बह रही है। सुविखा बाबू गांव एक बार फिर मैरूंड हो गया और एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ की पानी घुसने लगा है। राहत की बात यह है कि शुक्रवार को बारिश नहीं होने से नदी का जलस्तर स्थिर है। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर लाने के लिए प्रशासन की ओर से तीन नावों का प्रबंध किया गया है।
सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से तटबंध और नदी के बीच बसे सुविखा बाबू गांव एक फिर मैरुंड हो गया है। यहां के ग्रामीण अब नाव से ही आ जा रहे हैं। आंशिक टेढ़वा, विशुनदासपुर की अनुसूचित बस्ती, खजांचीपुर का एक पुरवा, अशोकपुर ग्राम पंचायत के कई पुरवों के तरफ बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है। कटरिया-चांदपुर तटबंध पर ठोकर नंबर एक पर बाढ़ के पानी का दबाव बना हुआ है। गौरा-सैफाबाद तटबंध पर पानी का दबाव तेज है। टकटकवा रिंगबाध पर एक बार फिर कटान का खतरा पैदा हो गया है। गौरा सैफाबाद तटबंध के एसडीओ हरिश्चंद्र ने बताया की जलस्तर बढ़ रहा है, लेकिन शुक्रवार दोपहर बाद से नदी का जलस्तर स्थिर दिख रहा है। तटबंध पर लगातार नजर रखी जा रही है। तटबंध पूरी तरीके से सुरक्षित है। कटरिया चांदपुर तटबंध के सहायक अभियंता जितेंद्र कुमार ने बताया की जलस्तर बढ़ने से फिलहाल तटबंध पर कोई खतरा नहीं है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है। एसडीएम हर्रैया सुखबीर सिंह ने कहा कि मैरूंड गांव सुविखा बाबू में तीन नावें लगाई गई हैं।
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कई परिवारों ने तटबंध पर डाला डेरा
कटरिया-चांदपुर, गौरा-सैफाबाद तटबंध पर कई परिवारों ने डाल रखा है। यहां वह लोग पहुंचने लगे हैं, जिनके घर नदी और तटबंध के बीच में हैं। करीब एक दर्जन परिवार यहां अपने मवेशियों के साथ पहुंचे हैं। बाढ़ के चलते पशुओं के चारे का भी संकट खड़ा हो गया है।
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