मैरूंड गांव सुविका बाबू में गिरा छप्पर का घर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खतरे के निशान से 37 सेंटीमीटर ऊपर बह रही सरयू नदी ने तटवर्ती गांवों में तबाही मचानी शुरू कर दी है। कुदरहा, दुबौलिया और विक्रमजोत ब्लॉक के कई गांवों में नदी का पानी घरों से टकराकर हिलोरे मार रहा है। कई स्थानों पर कटान तेज होने से तटबंधों पर भी दबाव बढ़ गया है। नदी के हिलोरों के घरों से टकराने से ग्रामीणों में दहशत है।
प्रशासन ने आपात स्थिति से निपटने के लिए बाढ़ शरणालयों की व्यवस्था दुरुस्त कराई है। बुधवार को सुबह 10 बजे सरयू का जलस्तर स्थिर रहा लेकिन शाम पांच बजे अयोध्या पुल पर जलस्तर 93.10 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 92.73 मीटर है। नदी की धारा तेज होने के कारण तटवर्ती इलाकों में खतरा बरकरार है।
दुबौलिया क्षेत्र के सुविका बाबू और आंशिक टेढ़वा गांव में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। चारपाई, चारा मशीन समेत गृहस्थी का सामान पानी में डूब गया है। ग्रामीण खाद्य सामग्री को कच्चे-पक्के मकानों के बड़ेर और छज्जों पर सुरक्षित रखने को मजबूर हैं। घरों में पानी भरने से खाना पकाने में भी परेशानी हो रही है।
आवागमन के लिए इन गांवों में पांच मोटरबोट लगाई गई हैं। स्कूली बच्चे भी मोटरबोट से विद्यालय जाने को मजबूर हैं। पानी भरने से कुछ छप्पर के घर गिरने लगे हैं। सरयू की दो धाराओं के बीच बसे देवारागंगबरार, कुर्मियाना, सतहा, दस नंबर पुरवा, भुवरिया, विशुनदासपुर की अनुसूचित बस्ती, श्रीराम पुरवा, बरदियालोहार और पूरे मोतीराम की ओर भी पानी फैल रहा है। माझा क्षेत्र की फसलें जलमग्न हो गई हैं।
सरयू नदी के पानी से घिर गया महुआपार कला गांव
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर से खलवा गांव तक करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में नदी का दबाव बढ़ गया है। उमरिया रिंगबांध भी खतरे में है। नदी कटान करते हुए बांध के करीब पहुंच गई है। कटान स्थल पर लगातार पांचवें दिन मरम्मत कार्य जारी रहा। ग्रामीणों का कहना है कि रिंगबांध क्षतिग्रस्त हुआ तो उमरिया, किशुनपुर, कनघुसरा, नाउपुरवा और कोईरीपुरवा समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच सकता है।
विक्रमजोत-धुसवां तटबंध पर नदी का दबाव : विक्रमजोत। सरयू नदी का दबाव विक्रमजोत-धुसवां तटबंध पर भी बढ़ गया है। दुधौरा पूरेराम गांव के पास नदी तटबंध से सटकर बह रही है। आसपास कटान भी हो रही है।
ग्रामीणों ने तटबंध पर दो किलोमीटर के दायरे में स्थापित दो बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों की नियमित मौजूदगी नहीं होने का आरोप लगाया है। पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, अर्जुनपुर और लकड़ी दूबे गांवों का तटबंध से संपर्क टूट गया है। गांवों में पानी घुसने के कारण ग्रामीण नाव के सहारे आवागमन कर रहे हैं।
300 से 500 लोगों के लिए शरणालय तैयार : बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने बरसांव ग्राम पंचायत के एक बड़े भवन में शरणालय तैयार कराया है।
नांव के सहारे आ- जा रहे सुविका बाबू गांव के लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यहां एक साथ 300 से 500 बाढ़ पीड़ितों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। एसडीएम हर्रैया उमाकांत तिवारी ने बताया कि बाढ़ शरणालय में सभी आवश्यक इंतजाम कर दिए गए हैं। सुविका बाबू गांव के निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने फिलहाल शरणालय में जाने की इच्छा नहीं जताई।