अर्जुनपुर गांव के पास सरयू कर रही कटान संवाद
विक्रमजोत। सरयू नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे में पांच सेंटीमीटर बढ़ने से बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि बाढ़ का पानी उतरने के बाद गांवों में जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है लेकिन कटान प्रभावित क्षेत्रों में नदी के फिर से बढ़ने से जमीन कटने की आशंका बनी हुई है।
शुक्रवार शाम चार बजे केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार सरयू नदी का जलस्तर 92.160 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 92.730 मीटर से 57 सेंटीमीटर नीचे, जबकि चेतावनी स्तर 91.730 मीटर से 43 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर में धीरे-धीरे हो रही वृद्धि ने तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बीडी तटबंध के अंदर बसे शंभूपुर, पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, लकड़ी दूबे और अर्जुनपुर समेत कई गांवों के ग्रामीण कटान को लेकर आशंकित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान ही नदी ने कई स्थानों पर कटान शुरू कर दिया था। अब कई दिनों बाद जलस्तर में फिर से वृद्धि होने लगी है, जिससे कटान तेज होने का खतरा बना हुआ है। उधर, बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी ग्रामीणों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। मवेशियों के लिए चारे की समस्या बनी हुई है। पशुओं का पेट भरने के लिए ग्रामीणों को दूर-दराज के क्षेत्रों से चारा जुटाना पड़ रहा है।
वहीं, पानी में डूबी फसलों और वनस्पतियों के सड़ने से दुर्गंध उठ रही है। इससे संक्रामक बीमारियों के फैलने और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। किसान अब खेती-किसानी के साथ घर-गृहस्थी भी संभालने में जुट गए हैं। दुबौलिया के सुविका बाबू, टेढ़वा में भी अभी सांसत है। वहीं कुदरहा के मईपुर और महुआपार गांव के कुछ हिस्सों में नदी सटकर बह रही है। इससे कटान का खतरा बना है। बताया गया कि सरयू खतरे के निशान से नीचे हैं मगर इधर कुआनो के जलस्तर में वृद्धि से धान फसल डूब गई है।
कोट :::जलस्तर बढ़ा है लेकिन खतरे के निशान से काफी नीचे है। फिर भी संवेदनशील तटबंधों की निगरानी लगातार जारी है। -दिनेश कुमार, एक्सईएन बाढ़ खंड, बस्ती।