बस्ती। सरयू नदी चेतावनी बिंदु से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। मंगलवार को जलस्तर स्थिर रहा, लेकिन नेपाल से छोड़े जा रहे पानी के कारण कभी भी इसमें फिर बढ़ोतरी हो सकती है। माझा क्षेत्र के विक्रमजोत, दुबौलिया और कुदरहा ब्लॉक के 10 से 15 गांवों में नदी आबादी के करीब पहुंच गई है। कटान के खतरे से ग्रामीण दहशत में हैं और कई गांवों में लोग रातभर जागकर नदी की निगरानी कर रहे हैं। तटबंधों पर बढ़ते दबाव ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।
दुबौलिया क्षेत्र में माझा बेल्ट के निचले इलाकों में नदी का पानी तेजी से फैल रहा है। हालांकि यहां कटान की सूचना अभी कहीं से नहीं मिली है। सुबिका बाबू, अशोकपुर, देवरारगंगबरार आदि गांव के सिवान में नदी का पानी भर गया है। पशु पालकों को मवेशियों के लिए चारा नाव के सहारे लाना पड़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या कार्यालय के अनुसार मंगलवार की शाम पांच बजे जलस्तर 91.88 मीटर पर दर्ज किया गया है।
यह चेतावनी बिंदु से 25 सेंटीमीटर ऊपर है। वहीं कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर गांव से लेकर खलवा गांव तक दो किमी की दूरी में नदी का दबाव बना हुआ है। चौकी पर तैनात बाढ़ खंड की टीम लगातार निगरानी कर रही है।
नहीं भरे गए रेनकट, तटबंध पर खतरा
कुदरहा। कलवारी-रामपुर तटबंध पर बने रेनकट इस बार नहीं भरे गए हैं। बारिश होने से रेनकट की संख्या और बढ़ गई है। जिससे तटबंध जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया है। सरयू नदी विकराल रूप अख्तियार करने लगी है। क्षेत्र के कई मईपुर, मदरहवा पुरवा, महुआपार कला व खुर्द, टेंगरिया राज समेत कई तटबंध विहीन गांवों में बाढ़ का खतरा है। कलवारी-रामपुर तटबंध पर नदी का दबाव भी बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना हैं कि तटबंध की सुरक्षा को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। तटबंध पर बने खतरनाक गहरे गड्ढे कटान का कारण बन सकते हैं। यदि तटबंध कटा तो कई और गांव प्रभावित हो जाएंगे। इससे गांवों में दहशत का माहौल है। संवाद
लोग बोले-
कलवारी-रामपुर तटबंध के पास सरयू नदी का बहाव तेज हो गया है। तटबंध की मरम्मत इस बार नहीं कराई गई है। कई जगह रेनकट के चलते गहरे गड्ढे बन गए हैं।
-राम विलास, हरखौलिया।
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सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से परेशानी बढ़ गई है। काफी परिश्रम से खेतों में उगाई गई फसल डूबकर बर्बाद हो रही है। नदी का रुख भी गांव की तरफ हो रहा है।
-राजेंद्र मटियरिया।
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हम लोग प्रत्येक वर्ष बाढ़ की विभीषिका झेलते है। हर बार खेती बारी से लेकर घर-गृहस्थी बाढ़ में बर्बाद हो जाती है। इस तबाही से बचाने के लिए कभी कोई ठोस उपाय नहीं होता है।
-हरिराम पासवान, महुआपार।
अभी तक बंधे का मरम्मत कार्य नहीं हो पाया है। कागजों में सब चकाचक है। जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बाढ़ ने तबाही मचाई तो इसका खामियाजा हम गांव वाले भुगतेंगे।
-दीपक, पिपरपाती एहतमाली।
कोट
मईपुर और मदरहवा में कटानरोधी कार्य शुरू करा दिए हैं। अभी कटान की सूचना कहीं से नहीं है। एहतियातन 16 बाढ़ चौकियों को सक्रिय किया गया है। तटबंध और नदी पर 24 घंटे निगरानी की जा रही है।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड।