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कुदरहा में सरकारी धन की बंदरबांट, डीएम तक पहुंचे ग्रामीण

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कुदरहा में सरकारी धन की बंदरबांट, डीएम तक पहुंचे ग्रामीण
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बस्ती। जनपद के कुदरहा ब्लॉक में पशुचरन व नाली निर्माण के नाम पर लाखों रुपये के सरकारी धन की बंदरबांट का मामला सामने आया है। इस योजना का लाभ ऐसे कई लोगों को कागजों में दे दिया गया, जिनके पास एक भी पशु नहीं हैं। इस मामले की शिकायत ग्रामीणों ने जिला प्रशासन तक पहुंचाई है।
कुदरहा ब्लॉक के कुदरहा गांव में सरकारी धन का दुरुपयोग करने का मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। गांव के ही दो ग्रामीणों ने शपथ पत्र के साथ अलग-अलग शिकायती पत्र देकर डीएम से लाखों रुपये के सरकारी धन का दुरुपयोग एवं बंदरबांट करने का आरोप लगाकर जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता राम सिंह ने बताया कि प्रधान पति ने ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से बिना काम कराए ही नाली निर्माण के नाम पर लाखों रुपये निकाल लिया है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में राम सिंह के घर से तालाब के किनारे तक नाली निर्माण के नाम पर बिना काम कराए ही भुगतान ले लिया गया है। जिसके कारण घरों से निकलने वाला गंदा पानी रास्ते में बह रहा है। इस मार्ग से लोगों का आना जाना मुश्किल हो गया है। दूसरे शिकायतकर्ता रामआज्ञा ने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में कुल 70 लाभार्थियों का पशु चरन स्वीकृत हुआ था। जिसका पूरा भुगतान भी हो गया है। लेकिन, अभी भी पशु चरन का निर्माण आधा अधूरा है। इतना ही नहीं, गांव के दस लोगों को वर्ष 2015-16 में पशुचरन के लिए धन दिया गया और इन्हीं को दोबारा वर्ष 2020-21 में कागजों में धन देकर लाखों रुपये का गोलमाल कर लिया गया है।
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-इनसेट-
ऐसे निकाला जाता है धन
ग्रामीणों के अनुसार तीन नाद का पशु चरन निर्माण में 60-70 हजार रुपये व पांच नाद वाले पशु चरन निर्माण के लिए एक लाख बीस हजार रुपये मिलता है। उसके बाद मनचाहे फर्म से सामग्री का भुगतान और मजदूरी का धन मनचाहे मनरेगा मजदूर के खाते में भेज दिया जाता है। उसके बाद धान निकालकर बंदरबांट कर दिया जाता है जिससे धरातल पर कार्य दिखाई ही नहीं पड़ता है।
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बोले, सीडीओ
सीडीओ डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि शिकायत संज्ञान में आ गई है। इसकी जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ी तो संबंधितों से रिकवरी भी होगी।
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