गौर ब्लॉक के पेड़ार गांव में ताला बंद आरआरसी सेंटर। संवाद
बस्ती। ग्रामीण अंचल में कचरा अपशिष्ट प्रबंधन की पहल फेल होती नजर आ रही है। कूड़ा प्रबंधन के लिए बनाए गए एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (आरआरसी) कई गांवों में बेमतलब साबित हो रहे हैं।
यह सेंटर या गांव से काफी दूर सिवान में बना दिए गए हैं या फिर ताले में बंद कर दिए गए हैं। गौर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत पेड़ार और मझौआ चौधरी में बंद पड़ा आरआरसी सेंटर इसका नजीर है।
जिले के गौर ब्लाॅक के ग्राम पंचायत पेडार में बना आरआरसी सेंटर शोपीस बनकर रह गया है। यहां घनी आबादी बसी है। अनुमानित एक क्विंटल कचरा प्रत्येक दो दिन के अंतर पर निकलता है। ग्रामीणों का कहना है कि एक साल पहले आरआरसी सेंटर बनाने के बाद उसमें ताला जड़ दिया गया है। जिससे उसका उपयोग ग्रामीण नहीं कर पा रहे हैं। विवश होकर लोगों को कूड़ा- कचरा खुले में फेंकना पड़ रहा है। जिससे गांव में गंदगी पसरी रहती है।
गांव में स्थित मस्जिद से पहले पोखरे के बगल में एक साल पहले आरआरसी सेंटर की स्थापना हुई थी। इसमें सूख और गीला कचरा फेंकने की व्यवस्था बनाई गई थी। मगर सेंटर को इस्तेमाल में नहीं लाया गया। ग्रामीणों को यह भी जानकारी नहीं है कि यहां ताला क्यों लटक रहा है। ग्राम प्रधान शीला देवी बताती हैं कि सेंटर कब खुलेगा इसकी जानकारी उन्हें भी नहीं है। इसका सटीक जवाब सचिव से पूछने के बाद ही दे पाएंगे।
बताया कि अभी केंद्र का कुछ पेमेंट फंसा हुआ है। इस वजह से निर्माण पूरा नहीं हो सका है। वहीं पड़ोस के ग्राम पंचायत मझौआ चौधरी में आरआरसी सेंटर आबादी से काफी दूर सिवान में बना दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिक दूरी होने के कारण गांव की महिलाएं और बच्चे कूड़ा लेकर सेंटर तक नहीं पहुंच पाते हैं। ऊपर से सेंटर में ताला भी बंद है। ऐसे में खुले में ही कचरा फेंका जा रहा है। जिसके निस्तारण का कोई विकल्प नहीं है।