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Basti News: पाउडर दूध से बन रही रसभरी...चमका रहा सोडा

Tue, 25 Nov 2025 12:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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शादी-विवाह के आयोजनों में कुछ इस तरह से भेज रहे हैं मिलावटी पनीर व मिठाई - फोटो : वाहनों को डायवर्ट करते पुलिसकर्मी।
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बस्ती। सहालग के सीजन में रसभरी मिठाइयों से ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। धंधेबाज सिंथेटिक एवं पाउडर के दूध से छेना, रसगुल्ला, राजभोग आदि तैयार कर रहे हैं। इसे चमकाने के लिए सोडा आदि केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं। शीरा और रंगों के इस्तेमाल से स्वादिष्ट और आकर्षक बनाया जा रहा है। लेकिन, डॉक्टर इसका सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक बता रहे हैं।
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सहालग में मिठाई की मांग को देखते हुए धंधेबाज सक्रिय हो गए हैं। डिमांड पूरा करने के लिए बाहर से डिब्बाबंद मिठाई और पनीर मंगा रहे हैं। बाजार से मिठाई की खरीदारी करते समय मिलावट से सावधान रहने की जरूरत हैं। जानकारों ने बताया कि जांच परख के बाद ही बाजार से मिठाई खरीदें, मिलावटी मिठाई और पनीर बीमार कर सकती है। बताया कि इस सीजन में मिठाई की डिमांड ज्यादा होती है। दुकानदार भी मिठाई की डिमांड को देखते हुए बाहर से डिब्बाबंद मिठाई मंगाते हैं।
यह मिठाई गोरखपुर, गोंडा, आंबेडकरनगर, बलरामपुर, अयोध्या, नवाबगंज व स्थानीय लोकल बाजार से आती है। ऐसे में उन्हें लेने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है। इसमें केमिकल युक्त पाउडर, सस्ता वनस्पति घी और रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल होता है। यह शहर के तमाम जगहों पर बिक रहे हैं। जो सेहत के लिए खतरनाक है। ऐसे में अच्छी दुकान से ही मिठाई खरीदें। डिब्बाबंद रसभरी मिठाई में अरारोट मिल रहा है। खाने के बाद पेट को नुकसान पहुंचा रहा है।
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इस समय बाजार में सहालग को लेकर मिलावटी मिठाई को खपाए जाने की तैयारी है, जो आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। मिलावट खोर मोटा मुनाफा कमाने के लिए लोगों की सेहत की परवाह तक नहीं करते। दूध एवं उससे बनने वाले मावा, पनीर आदि में मिलावट की सबसे ज्यादा आशंका रहती है।
खाद्य सुरक्षा विभाग भी समय-समय पर इसके विरुद्ध अभियान चलाता है। दिवाली में हड़िया के पास मेंहदावल रोड पर छापेमारी में बड़े पैमाने पर मिलावटी खाद्य पदार्थ बरामद किया था। जो मिलावटी था उसे टीम ने नष्ट करा दिया था। यह कच्चा खाद्य पदार्थ बाहर से मंगवाए थे, जिसे बनाकर ग्राहकों को परोस देते थे।

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बाहर से आती है डिब्बाबंद मिठाई

जिले में बाहर से डिब्बाबंद मिठाई आती है। जिसकी खपत जिले में ज्यादा है। इसमें काजू बर्फी, सामान्य खोवा बर्फी, पेड़ा, पपड़ी, रसगुल्ला, लाल मोहन शामिल है। यह मिठाई 160 रुपये से 180 रुपये किलो तक मिलते हैं। यहां पर आने के बाद इसका भाव 260 से 320 रुपये हो जाता है। जिससे व्यापारियों का काफी फायदा होता है। इसमें उन्हें कारीगर नहीं रखने पड़ते हैं। उसका खर्च बचता है।

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खराब मिठाई को फिर से बना देते हैं बर्फी

सहालग के समय धंधेबाज कुछ भी नहीं छोड़ रहे, जो मिठाई एक सप्ताह से अधिक हो जाता है और वह खराब हो जाता है तो कारीगर उसे फिर भूनकर चाकलेट बर्फी बनाते हैं। इसमें वह चीनी का प्रयोग करते हैं। इसके बाद यह फिर बिक्री के लिए तैयार हो जाता है। अगर इसका लगातार सेवन किया जाता है तो वह पेट के लिए हानिकारक होता है।

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नकली-असली पनीर की ऐसे करें पहचान
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल कुमार सिंह का कहना है कि असली और नकली पनीर की पहचान हाथों से मसलकर लगा सकते हैं। अगर आपका पनीर मसलने के बाद टूटकर गिरने लगता है। इस स्थिति में समझ जाइए कि पनीर नकली है। नकली पनीर की पहचान पानी में उबालकर भी कर सकते हैं। इसके लिए पनीर को पानी में उबालने के लिए रखना है। इसके बाद पनीर को पानी से निकालकर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। ठंडा होने के बाद पनीर पर सोयाबीन या अरहर का पाउडर डालकर 10 मिनट के लिए छोड़ देना है। ऐसा करने के बाद अगर पनीर का रंग हल्का लाल हो जाता है तो खरीदा गया पनीर डिटर्जेंट या यूरिया से बनाया गया है।
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लिवर को नुकसान पहुंचाता है मिलावटी मिठाई
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि मिठाई और पनीर में मिलावट सेहत के लिए नुकसानदेह है। इसमें अगर केमिकल युक्त कलर मिला हुआ है तो वह सीधे लीवर पर असर डालता है। पेट के लिए भी इस तरह के केमिकल नुकसानदायक होते हैं। मिलावटी मिठाई किडनी, लीवर, पेट के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं। सहालग में इसके सेवन से बचें।
कोट

लगातार छापेमारी की जा रही है। संदेह के आधार पर नमूना लिया जाता है। नमूना फेल होता है तो कार्रवाई भी की जाती है जुर्माना लगाया जाता है। सहालग में छापेमारी अभियान चल रहा है। लोगों को सजगता के साथ खाद्य पदार्थों को खरीदना चाहिए।
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-चितरंजन कुमार सिंह, जिला अभिहित अधिकारी, बस्ती।
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