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धनुष टूटते ही राम के जयकारे से गूंजा पंडाल

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मंचन करते कलाकार। - फोटो : amar ujala
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दुबौलिया। ब्लॉक क्षेत्र के खुशहालगंज की रामलीला में धनुष यज्ञ, परशुराम लक्ष्मण संवाद का मंचन किया गया।  आदर्श रामलीला समिति के कलाकारों की ओर से धनुष यज्ञ के सजीव मंचन पर धनुष टूटने पर जयकारे गूंजने लगे।
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राजा जनक ने सीता के विवाह के लिए यज्ञशाला का आयोजन किया था। जब दूर-दूर से आए बलशाली राजा व योद्धा शिव धनुष को हिला नहीं पाए तो मिथिला नरेश की निराशा भरी बात सुनकर लक्ष्मण क्रोधित हो उठे। बोले कि इस तरह की बात सत्यवादी हरिश्चंद्र के वंशज, क्षत्रियों तथा रघुवंशी राजा दशरथ के पुत्रों का घोर अपमान है। यह दृश्य देखकर श्रद्धालु रोमांचित हो उठे। सीता स्वयंवर में मुलाकात के दौरान रावण ने प्रभु श्रीराम को लंका आने का न्योता दिया। उनसे कहा कि लड़ाई के दौरान मेरे हाथों में भगवान शिव द्वारा दिए गए प्राण रक्षक चंद्र हास तलवार तथा आपके हाथों में धनुष बाण होगा। रावण ने वचन लिया कि यदि मैं युद्ध में पराजित हुआ तो प्रभु मेरे संपूर्ण परिवार को समाप्त कर दीजिएगा। गुरु विश्वामित्र के आदेश पर शिव धनुष के पास पहुंचते ही पहले उसे प्रणाम किया। धनुष को उठाते ही तोड़ दिया। उसके बाद मां सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला डाल दिया। धनुष टूटते ही प्रभु के जयकारों से रामलीला परिसर गूंज उठा। इस मौके पर विजय शंकर सिंह, अमर बहादुर, सुनील सिंह, दिलीप सिंह, विनोद सिंह, हरीराम, जीत बहादुर, श्रीश सिंह, तेजभान, प्रवीण,सोनू सिंह, अमरपाल सिंह, वीरेंद्र पाल सिंह, विनोद यादव, सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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डीजे की धुन पर लक्ष्मी प्रतिमाएं विसर्जित
दुबौलिया। क्षेत्र के विभिन्न गांवों में स्थापित लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाओं का सोमवार को विसर्जन हुआ। वैदिक मंत्रों के बीच पहले पूजन और आरती की गई। डीजे की धुन पर नाचते-गाते श्रद्धालुओं ने प्रतिमाओं विसर्जन किया। इसमें शुकुलपुरा, बैरागल, बेदपुर, डेयीडिहा में स्थापित लक्ष्मी गणेश वा सरस्वती की प्रतिमाओं की रामजानकी मार्ग पर झांकी निकाल डीजे पर थिरकते व जयकारा लगाते हुए सरयू तट गौरा घाट पर हुआ।
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