आचार्य राम चन्द्र शुक्ल बालिका इण्टर कालेज अगौना मे आचार्य राम चंद्र शुक्ल के जयंती पर मार्ल्यापण करते डीआईजी लक्ष्मी नरायन।
हिंदी साहित्य के गौरव व समालोचना के शिखर पर विराजमान आचार्य राम चंद्र शुक्ल की 132वीं जयंती मंगलवार को समारोह पूर्वक मनाई गई। वक्ताओं ने अनुशासन को सफलता की पहली महत्वपूर्ण सीढ़ी करार दिया। आचार्य राम चंद्र शुल्क बालिका इंटर कॉलेज अगौना में आयोजित जयंती समारोह के मुख्य अतिथि डीआईजी लक्ष्मी नरायन ने कहा कि आचार्य शुक्ल के समय अंग्रेजों का शासन था। आर्चाय शुक्ल, पं. मदन मोहन मालवीय के समय हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष थे। अनुशासन और संकल्प के बल बूते साहित्य के शिखर पर पहुंचे। विद्यार्थियों से कहा कि अपने आप को अनुशासित करें, माता-पिता को इज्जत दें तथा देश के प्रति समर्पित रहें। पूर्व विधायक अंबिका सिंह, संतोष कुमार सिंह, राजकुमार सिंह मंजुल, सतीश आर्य, डॉ. सुरेश, ज्ञानेन्द्र द्विवेदी, सत्येन्द्र नाथ मतवाला ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सोनी पाठक, पूजा दुबे, अनुपमा के सरस्वती वंदना से हुआ। दीक्षा, रोशनी, दिव्या, रचना ने स्वागत गीत तथा प्रियंका, अंकिता, पुनीता, फिरदौस ने देश भक्ति गीत, राधिका, सबनम, संध्या ने अनपढ़ बहू व मनीता, आफरीन, अन्नू, वंदना, अंजनी, कोमल दीपांशी ने अत्याचारी पति का नाटक प्रस्तुत कर लोगों को चिंतन पर विवश कर दिया। आयोजक डॉ केपी मिश्र ने आभार जताया। कार्यक्रम में डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग, अनिरूद्ध प्रसाद त्रिपाठी, राम गुलाम यादव, घनश्याम, जगदंबा प्रसाद, विनोद कुमार श्रीवास्तव, अरूणेश आदि रहे।