कांग्रेस का साथ छोड़ बसपा में शामिल हो गए राजकिशोर
नीरज श्रीवास्तव
बस्ती। जिले के कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह ने ‘हाथ’ का साथ छोड़कर ‘हाथी’ की सवारी कर ली है। राजकिशोर ने बृहस्पतिवार को दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के सामने बसपा का दामन थामा है। पूर्वांचल में राजनीतिक रूप से पिछड़ी बसपा ने एक बार फिर से राजकिशार सिंह पर दांव खेला है। हालांकि, राजकिशोर ने इसकी पुष्टि नहीं की है, मगर उनके प्रतिनिधि खादिम हुसैन ने बताया कि पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह बसपा में शामिल हो गए हैं।
बसपा ने पिछले दिनों पूर्व मंत्री रामप्रसाद चौधरी व उनकी पूरी टीम को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इस निर्णय की खासी चर्चा रही, क्योंकि पूर्वांचल में बसपा की जमीन इन्हीं नेताओं के कंधों पर थी। रामप्रसाद बाद में सपा में शामिल हो गए। इसके बाद बसपा जिले में कमजोर महसूस कर रही थी। इधर, राजकिशोर सिंह लोकसभा चुनाव में सपा छोड़ कांग्रेस के साथ खड़े हो गए और लोकसभा चुनाव भी कांग्रेस के सिम्बल पर लड़ा। हालांकि इस चुनाव में पराजित हो गए, मगर आमजन में उनकी लोकप्रियता लोकसभा चुनाव में और बढ़ गई। बसपा से रामप्रसाद की विदाई के बाद पार्टी को एक ऐसे चेहरे की तलाश थी, जो उनके जनाधार को और मजबूत कर सके। उसकी यह तलाश हर्रैया से तीन बार विधायक व बसपा व सपा सरकार में मंत्री रहे राजकिशोर सिंह पर पूरी हो गई।
ये है राजनैतिक सफर
वर्ष-1990 में छात्र राजनीति में कदम रखने वाले पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह की राजनैतिक यात्रा में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। राजकिशोर सिंह 1990-91 में छात्र राजनीति से चर्चा में आए। वह एपीएन कॉलेज छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। वर्ष-2000 में जिला पंचायत सदस्य बने। वर्ष-2002 में बसपा के टिकट पर हर्रैया विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और पहले ही प्रयास में सफल हो गए। बसपा की सरकार बनी तो उन्हें उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री बनाया गया। वर्ष-2003 में मुख्यमंत्री मायावती का तख्ता पलट होने के बाद राजकिशोर 40 विधायकों के साथ सपा में शामिल हो गए। मुलायम सिंह मुख्यमंत्री बने और वह मंत्री। विभाग वहीं रहा, वह वर्ष-2007 तक सपा सरकार में मंत्री रहे। वर्ष-2007 से 2012 तक प्रदेश में बसपा की सरकार रही और वे सपा से विधायक। सत्ता बदली और एक बार फिर राजकिशोर सिंह का कद बढ़ गया। वर्ष-2012 में वह लगातार तीसरी बार विधायक और फिर मंत्री बने। तीसरी बार भी मंत्रिमंडल में उद्यान विभाग ही मिला, लेकिन वर्ष-2014 में विभाग बदलकर लघु सिंचाई मंत्री बना दिया गया। वर्ष-2015 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद उनका सरकार में अचानक कद बढ़ गया। भाई का एमएलसी का टिकट कटा तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राजकिशोर को पंचायती राज विभाग का अतिरिक्त प्रभार और भाई बृजकिशोर सिंह ‘डिंपल’ को ऊर्जा सलाहकार जैसा पद देकर संतुलित किया। इस बीच राज कशोर अपने पुत्र को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बिठाने में सफल रहे। सपा में कुछ विवादों के चलते वे पार्टी से दूर हो गए और बाद में उन्होंने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का दामन थाम लिया।