कलवारी–रामपुर तटबंध को बचाने के लिए डाला गया बोल्डर व बोरी में भरी बालू-संवाद
बस्ती। लगातार बारिश के बीच सरयू नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। नदी अभी खतरे के लाल निशान से 50 सेंटीमीटर नीचे बह रही है, लेकिन तटवर्ती इलाकों में तेज कटान और तटबंधों पर बने रेनकट व रैटहोल ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
विक्रमजोत, दुबौलिया और कुदरहा क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन और बाढ़ खंड की टीमें संवेदनशील स्थलों की निगरानी में जुटी हैं। केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या के अनुसार सोमवार शाम चार बजे सरयू का जलस्तर 92.23 मीटर दर्ज किया गया, जो लाल निशान 92.73 मीटर से 50 सेंटीमीटर नीचे है। सुबह से जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की गई।
नदी का पानी निचले इलाकों में फैलने लगा है, हालांकि अभी आबादी तक नहीं पहुंचा है। दुबौलिया क्षेत्र में कटरिया-चांदपुर तटबंध के करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में दबाव बढ़ गया है। कटान की जद में खेती की जमीनें, पेड़-पौधे और फसलें आने से किसान परेशान हैं। पशुओं के लिए हरे चारे का संकट भी गहराने लगा है। कई ग्रामीण नाव के सहारे चारा लाने को मजबूर हैं।
विक्रमजोत क्षेत्र में सरयू का बहाव एक बार फिर लाल निशान की ओर बढ़ रहा है। लोलपुर तटबंध पर केशवपुर के पास नदी तटबंध के बेहद करीब बह रही है। तटबंध पर बने रेनकट और रैटहोल को लेकर ग्रामीणों में दहशत है। उनका कहना है कि यदि जलस्तर और बढ़ा तो तटबंध पर खतरा बढ़ सकता है। हालांकि बाढ़ खंड के अधिकारियों का कहना है कि तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है। केशवपुर के पास नदी की धारा को नियंत्रित करने के लिए परक्यूपाइन समेत अन्य सुरक्षात्मक उपाय किए गए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है।
अधीक्षण अभियंता सुरेंद्र मोहन ने सोमवार को विक्रमजोत क्षेत्र में बीडी तटबंध, निर्माणाधीन एनएचआई पुल तथा कटान प्रभावित पकड़ी संग्राम गांव का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। सहायक अभियंता बृजेश सोनी ने बताया कि सुरक्षा कार्य लगातार जारी है और फिलहाल तटबंध को कोई खतरा नहीं है।