बस्ती। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय ने इस बार महाविद्यालयी परीक्षा का पैटर्न बदल दिया है। पहली बार बिना सचल दल के परीक्षा कराई जा रही है। इससे परीक्षा की शुचिता पर सवाल उठने लगे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि कंट्रोल रूम से वेब कॉस्टिंग के जरिये प्रत्येक केंद्र की निगरानी की जा रही है। इस वजह से वाह्य के साथ आंतरिक सचल दल की जरूरत नहीं पड़ रही है। वहीं जानकार बता रहे हैं इस व्यवस्था से नकल माफिया की चांदी हो गई है। तमाम केंद्रों पर बिगड़े माहौल में परीक्षाएं हो रही हैं।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से संबद्ध जिले में 66 महाविद्यालय संचालित हैं। इसमें पांच राजकीय, चार वित्तपोषित और 57 स्ववित्तपोषित कॉलेज शामिल हैं। इस बार कुल 56 केंद्रों पर परीक्षा कराई जा रही है। 10 दिसंबर से शुरू हुई परीक्षा में स्नातक तृतीय एवं पांचवें सेमेस्टर के अलावा प्रथम सेमेस्टर के बैक पेपर की परीक्षा कराई जा रही है। आरोप है कि वाह्य सचल दल का गठन न होने से परीक्षा की स्थलीय निगरानी नहीं हो पा रही है।
हाल ही में आंतरिक सचल दल की भी व्यवस्था खत्म कर दी गई है। 30 से कम छात्र संख्या पर एक ही कक्ष निरीक्षक की तैनाती अनुमन्य है। कक्ष निरीक्षकों का कहना है कि तीन घंटे की परीक्षा के दौरान यदि वाॅशरूम या पानी पीने के लिए बाहर निकलना पड़ रहा है तो उतने देर तक परीक्षा कक्ष में निगरानी करने वाला कोई नहीं होता है।
पहले इस अवधि में आंतरिक सचल दल की मदद ले ली जाती थी। इस बार आंतरिक सचल दल न होने से परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के दौरान विद्यार्थियों की गहन चेकिंग भी नहीं हो पा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि सभी केंद्रों की निगरानी के लिए विश्वविद्यालय में ही केंद्रीयकृत कंट्रोल रूम बनाया गया है। वेब कॉस्टिंग के जरिये प्रत्येक केंद्र पर परीक्षा के दौरान निगरानी की जा रही है।