जारी होने के बाद कंप्यूटर पर ‘नजर’ नहीं आता ई-टेंडर
बस्ती। पीडब्लूडी की ई-टेंडरिंग में रसूखदार भारी हैं। अपने रसूख के बल पर ऑनलाइन होते ही घंटे भर के लिए टेंडर दिखाई देता है, मगर उसके बाद यह डाटा सिस्टम से गायब हो जाता है। समय सीमा के अंतिम दिन फिर से आखिरी बार घंटे दो घंटे के लिए फिर इसे देखा जा सकता है इसके बाद फिर वही हाल होता है। यह काम विभाग के जिम्मेदारों के इशारे पर रसूखदार ठेकेदारों की तकनीकी कर्मी करते हैं। इसके बाद काम को लेकर उसे मनमाने ढंग से पूरा कराया जाता है।
पीडब्लूडी के ई-टेंडरिंग में खेल की जांच शासन करा रहा है। इस खेल का एक पहलू यह भी है कि करोड़ों के ठेके को मनमाने ढंग से बांटने के लिए जहां पात्रता का खेल होता है, वहीं ई-टेंडरिंग के ऑनलाइन सिस्टम पर भी रसूखदार अधिकारियों का नियंत्रण होता है। तय समय पर जैसे ही टेडर ऑनलाइन किए जाते हैं वैसे ही जिम्मेदारों की टीम सक्रिय होकर इसे अपने कब्जे में लेने के लिए डाटा को कंप्यूटर से ही हाइड यानी छिपा देती है। इसके बाद कोई भी प्रयास करे, मगर जब तक इसमें शामिल खिलाड़ी नहीं चाहेंगे तब तक वह नजर नहीं आएगा। इस गणित का लाभ वही ठेकेदार पाते हैं, जो इस पूरे मुहिम में शामिल होते हैं। क्योंकि अन्य ठेकेदार यदि देख भी ले अथवा जानकारी भी पा ले तो उसे यह ऑनलाइन कहीं नजर नहीं आएगा। नतीजतन वह अभिलेख आदि तैयार कर सकने में नाकाम हो जाता है। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि कंप्यूटर के इस गणित को इन्हीं जिम्मेदारों की टीम अब तक कई कामों में कर चुकी है, मगर उस पर किसी की निगाह नहीं है। हालांकि शासन स्तर पर इसकी भी शिकायत हुई है, मगर अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी है।
पीडब्लूडी के मुख्य अभियंता एपी सिंह ने कहा कि ई-टेंडरिंग में अब तक क्या हुआ यह तो जांच का विषय है। शासन स्तर पर इसकी जांच की जा रही है, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। जो भी टेंडर होगा उसे ऑनलाइन करने के बाद उस पर नजर रखी जाएगी। सभी ठेकेदारों को ई-टेंडरिंग में शामिल होने का मौका दिया जाएगा।