काम चलाऊ व्यवस्था में धक्का प्लेट दमकल
बस्ती। ईश्वर करे कभी ऐसी जरूरत न पड़े, मगर एक साथ कई जगह आग लग गई तो दमकल विभाग को हाथ मलने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। कारण ये है कि फायर की गाड़ी चलाने के लिए चालक ही नहीं हैं। छोटी-बड़ी मिलाकर नौ गाड़ी चलाने के लिए सिर्फ चार चालक तैनात हैं। दमकल की बाकी पांच गाड़ी कौन चलाएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
संसाधनों की उपलब्धता में तीन फायर टेंडर, एक वाटर माउजर और तीन छोटे वाहन हैं। इनमें दो बोलेरो और एक जीप शामिल है। फायरमैन की संख्या 10 से 21 तो हो गई, लेकिन वाटर पंप सिर्फ सात ही मौजूद हैं। इनमें से एक भी फेल हुआ तो मुसीबत खड़ी हो जाएगी। सीएफओ मंगेश कुमार का कहना है कि जिन फायरमैन के पास वाहन चलाने का लाइसेंस है, उनसे विषम परिस्थिति में गाड़ी चलवाई जाती है। ड्राइविंग के लिहाज से ट्रक-बस जैसे अन्य भारी वाहनों की अपेक्षा फायर टेंडर चलाना मुश्किल है। लीडिंग फायरमैन राम निवास का कहना है कि 45 सौ लीटर पानी भरकर जल्दी से जल्दी सूचना वाले स्थान पर पहुंचना होता है। अस्त-व्यस्त ट्रैफिक सिस्टम के बीच दूसरों को सुरक्षित बचाते हुए बिना देर किए गांव-कस्बों तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। मुख्य अग्नि शमन अधिकारी मंगेश कुमार का कहना है कि अग्निकांड की किसी भी घटना से निपटने के लिए विभाग तैयार है। आग का सीजन एक अप्रैल से शुरू होगा। इसके लिए अलग से प्रबंध किया जा रहा है। तहसील मुख्यालयों के अलावा कलवारी थाने पर फायर ब्रिगेड की टीम तैनात की जाएगी। तहसीलों पर समय से संसाधन मुहैया करा दिया जाएगा।
जोखिम में जिले के 35 सौ गांव
जिले के 7309 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में कहीं से भी आग की सूचना पर पहुंचना चुनौती है। चार तहसील, 14 ब्लॉक के 1245 ग्राम पंचायतों के 35 सौ से अधिक गांवों तक का जोखिम विभाग के जिम्मे है। इनमें से करीब पांच हजार गांव-मजरे ऐसे हैं जहां फायर टेंडर आसानी से नहीं पहुंच पाते। रास्ते की काफी समस्याएं आती हैं। ऐसी स्थिति में छोटी जीप ही काम आती है।
ये हैं संसाधन
सीएफओ एक, लीडिंग फायरमैन चार, फायरमैन 21, नियतन 21, फायर चालक चार, फायर टेंडर तीन, वाटर टेंकर दो, वाटर पंप सात हैं।
जिले पर एक नजर
तहसील चार, विकास क्षेत्र 14, क्षेत्रफल 7309 वर्ग किमी, कुल आबादी 29 लाख, थाना 16, फायर स्टेशन एक, सीजनल फायर स्टेशन 4 (हर्रैया, रुधौली, कलवारी, मुंडेरवा)।