- ग्लैक्सी आई इंस्टीट्यूट एंड पॉलीक्लीनिक में मरीज का हुआ था मोतियाबिंद का ऑपरेशन, बैठ गई आंख
- अस्पताल में आयुष्मान से संबंधित इलाज का विवरण तलब
बस्ती। शहर के एक निजी अस्पताल ग्लैक्सी आई इंस्टीट्यूट एंड पॉलीक्लीनिक में ऑपरेशन के बाद मरीजों की आंख खराब होने के मामले में बृहस्पतिवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने खुद इसकी मॉनीटरिंग शुरू कर दी। इसके बाद स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी सकते में आ गए। आनन-फानन संबंधित अस्पताल का लाइसेंस निलंबित किया गया। मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम भी गठित हुई। कुछ ही देर बाद संबंधित अस्पताल में पूरा विभागीय अमला धमक पड़ा।
यह आंख अस्पताल तब सुर्खियों में आया, जब यहां एक बुजुर्ग के मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद रोशनी चली गई और आंख भी बैठ गई। चर्चा है कि मरीज का इलाज आयुष्मान कार्ड से किया गया था। मामला बिगड़ने पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से उसे रुपये देकर लखनऊ भेजा गया। मरीज का दोबारा ऑपरेशन हुआ। लेकिन, रोशनी नहीं लौटी।
यह मामला तूल पकड़ते ही प्रमुख सचिव ने इसका संज्ञान लिया। उन्होंने जिला स्तर से संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई का फीडबैक मंगाना शुरू कर दिया। इसी के बाद विभागीय अमला हरकत में आया। सीएमओ डॉ. आरएस दुबे ने तत्काल प्रभाव से ग्लैक्सी आई इंस्टीट्यूट एंड पॉलीक्लीनिक का लाइसेंस निलंबित कर दिया। दो सदस्यीय जांच टीम गठित कर तत्काल मौके पर भेजा गया।
उधर प्रमुख सचिव स्तर से संबंधित अस्पताल में आयुष्मान योजना से किए गए इलाज का विवरण और कार्रवाई की रिपोर्ट तत्काल तलब की गई। जांच में पता चला कि इस माह आयुष्मान से कोई भुगतान संबंधित अस्पताल को नहीं हुआ है। वहीं जांच टीम के पहुंचने के दौरान चर्चा हुई कि अस्पताल सील होगा। इसी के कुछ देर बाद सीएमओ भी संबंधित अस्पताल में आ पहुंचे। लेकिन, इस दौरान निजी अस्पताल के चिकित्सक को निलंबन अवधि में अस्पताल संचालित न करने की हिदायत देकर छोड़ दिया गया।
टीम ने खंगाला मरीज का ब्योरा
प्रमुख सचिव के जवाब-सवाल के बाद ग्लैक्सी आंख अस्पताल में पहुंची टीम ने मरीज से संबंधित सभी ब्योरा खंगाला। टीम में शामिल डिप्टी सीएमओ डॉ. एसबी सिंह और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सारिब सुहेल ने मरीज की बीएसटी तलब की। इसके बाद मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक से पूछताछ भी की। टीम ने संबंधित मरीज को भी बुलाकर बयान दर्ज कराने की अपेक्षा जताई। लेकिन, मरीज ने आने में असमर्थता व्यक्त की। सीएमओ ने टीम को मरीज के घर जाकर बयान लेने के निर्देश दिए।
प्रकरण संज्ञान में आने के बाद मामले की जांच शुरू करा दी गई है। संबंधित अस्पताल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। हिदायत दी गई है कि अग्रिम आदेश तक मरीजों का उपचार प्रतिबंधित रहेगा।
- डॉ. आरएस दुबे, सीएमओ