मासूमों की मुस्कान छीन रहे जेई और एईएस से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग जागरूकता माहौल तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। इसमें ग्राम प्रधानों को माध्यम मानते हुए बुधवार को सहेजा गया। पहली अप्रैल से 15 तक दस्तक अभियान कार्यक्रम चलाया जाना है, जिसमें गौर सीएचसी कर्मचारियों ने ब्लॉक सभागार में प्रधानों को जागरूक किया गया।
सीएचसी के स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी राम आसरे सरोज ने जेई और एईएस की गंभीरता को समझाते हुए रोकथाम के लिए विभाग की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के बारे में बताया। कहा कि प्रधान यदि दक्ष होंगे तो संक्रामक बीमारियों को कम किया जा सकता है। बताया कि 15 वर्ष तक के बच्चों को दिमागी बुखार होने की आशंका ज्यादा रहती है। बच्चे को स्थायी रूप से मानसिक एवं शारीरिक अपाहिज भी बना सकती है। ऐसे में बच्चे को जेई का टीका अवश्य लगवाएं और घर के आसपास सफाई रखें।
सीएचसी प्रभारी अधीक्षक डॉक्टर एके मिश्र ने जागरूकता अभियान की अहमियत बताई। कहा कि इस अभियान में पंचायत राज विभाग व शिक्षा विभाग को भी जोड़ा गया है। इस मौके पर पूर्व ब्लॉक प्रमुख महेश सिंह, एडीओ पंचायत रामतेज वर्मा, बीएन मिश्र, संतोष श्रीवास्तव, प्रधान पारसनाथ यादव, कंचन सिंह, अब्दुल मालिक, रामदशरथ, शैलेंद्र कुमार, जितेंद्र सिंह, सूरज, गिरिजेश सिंह, बुद्धिराम यादव, देवेंद्रनाथ श्रीवास्तव, ओम प्रकाश, देवेंद्र नाथ, मीना रानी, रामउग्रह, विजयपाल यादव आदि मौजूद रहे।
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दस्तक के लिए प्रशिक्षित किए गए ग्राम प्रधान
नालियों की सफाई, शौचालय और फागिंग की दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
भानपुर।
एईएस/जेई से बचाव के लिए ग्राम प्रधानों को भी प्रशिक्षित किया गया है। दस्तक योजना के तहत बुधवार को रामनगर ब्लॉक सभागार में ग्राम प्रधानों के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीमारी से बचाव, स्वच्छता आदि बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया। जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी एलके पाण्डेय, सीएचसी अधीक्षक डॉ विवेक विस्वास व एडीओ पंचायत रामचंदर वर्मा ने सावधानियां के प्रति जागरूकता लाने की अपील की।
डीएचईओ एलके पांडेय ने बताया कि कोई भी बुखार दिमागी बुखार हो सकता है। बीमारी के लक्षण तेज बुखार आना, लगातार बने रहना, सुस्त होना, दांत पर दांत बैठना, शरीर में झटके आना, बोल न पाना, शरीर के किसी अंग मे एेंठन होने की शिकायत हो तो उसे बिना कोई देरी किए निकट के सीएचसी में एंबुलेंस की मदद लेकर भर्ती कराएं। अधीक्षक डॉ. विवेक विस्वास ने बताया कि बीमारी होने पर घरेलू इलाज, अप्रशिक्षित डॉक्टर अथवा झाड़- फूंक के चक्कर में न पड़ें। मरीज को कोई भी दवाई बिना जांच के न दें। बच्चों को सभी टीके समय से लगवाएं। पीने के लिए साफ अथवा उबले पानी का ही इस्तेमाल करें। एडीओ पंचायत रामचन्दर वर्मा ने खुले में शौच न करने, उसके लिए हमेशा शौचालय का ही प्रयोग करने। गांवों के नालियों की नियमित साफ-सफाई के साथ मच्छररोधी दवा का छिड़काव कराने तथा आसपास मच्छरों को न पनपने देने की बात कही। साथ ही जानवरों को अपने रहने के स्थान से थोड़ा दूर रखने और शौच के बाद हाथ से साबुन से धोने की ग्राम प्रधानों से अपील की। ग्राम प्रधानों के साथ सभी ग्राम विकास अधिकारी, रोजगार सेवक और सफाई कर्मी मौजूद रहे।
ग्राम प्रधानों को प्रशिक्षित किया
बनकटी। ब्लॉक परिसर में बुधवार को सहायक विकास अधिकारी राम प्रकाश पांडेय के नेतृत्व में जेई/एईएस से बचाव की जानकारी ग्राम प्रधानों को दी गई। एक से 15 अप्रैल तक चलने वाले दस्तक अभियान की सफलता के लिए ट्रेनर अब्दुल हकीम हाश्मी और धर्मेंद्र चौधरी ने टिप्स दिए। कहा कि जेई व एईएस का टीका एक से 15 वर्ष तक के बच्चों को अवश्य लगवाएं। खुद और घर के आसपास साफ सफाई तथा सोते समय मच्छर दानी लगाने के लिए प्रेरित किया। डॉ. धर्मेंद्र चौधरी ने मस्तिष्क ज्वर के बारे में बताया। इस दौरान राजेंद्र चौधरी, रामजियावन यादव, बबलू दूबे, पिन्टू मिश्रा, रमाकांत चौधरी, वकील अहमद, अरविंद कुमार चौधरी, मनोज कुमार, राजाराम, पन्ने लाल यादव, कैलाश नाथ पांडेय आदि शामिल रहे।