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नेताओं के काफिले पर पीड़ितों ने उतारा गुस्सा

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सभास्थल पर राहत सामग्री लेने के लिए जुटे लोग। - फोटो : amar ujala
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बस्ती। हमें इमदाद नहीं पक्का बांध चाहिए। आएदिन कटान से नींद हराम हो गई है। रोज-रोज गृहस्थी समेटना पड़ता है। यह कहना है सरयू नदी के तटवर्ती ग्रामीणों का। मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात कहना चाहते थे लेकिन सभास्थल पर एंट्री नहीं मिलने से भड़क गए और सड़क पर बवाल शुरू कर दिए। नेताओं के काफिले पर गोबर और रोड़े फेंके तो कई ने स्वागत की होर्डिंग्स फाड़कर आग के हवाले कर दिया।
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बृहस्पतिवार को दुबौलिया के कटरिया-चांदपुर तटबंध के बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद आए थे। ग्रामीणों का आरोप था कि वास्तविक कटान स्थल नहीं दिखाकर ठोकर पर मरम्मत कार्य दिखाया गया। इससे गुस्साए गांववालों ने सड़क जाम कर दी। भीड़ संभालने के लिए सुरक्षा में लगाई फोर्स को भी इनके गुस्से का शिकार होना पड़ा। सूचना मिलते ही सीओ कलवारी अरविंद वर्मा और सीओ हर्रैया राहुल पांडेय पहुंचे। पुलिसकर्मियों को भीड़ पर नियंत्रण के लिए निर्देशित करते रहे लेकिन महिला शक्ति के आगे अफसर भी असहज महसूस करने लगे। महिलाएं भी पुलिस से गुत्थमगुत्थी करने लगीं। सख्ती के बाद पुलिस ने हटाया तभी बारिश ने उन्हें भागने पर मजबूर कर दिया। 

हेलीपैड के पास से ही शुरू हुआ विवाद 
एडी एकेडमी में बनाए गए हैलीपैड के बगल राम कुबेर के घर पर कुछ भाजपाई समर्थकों संग बैठे थे, तभी पुलिस कर्मियों ने अभद्र भाषा में खदेड़ना शुरू कर दिया। हर्रैया नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन ध्रुव सिंह भड़क गए। पुलिस कर्मियों के इस व्यवहार को सीएम से कहने की बात कही। इस पर पुलिस कर्मी बैकफुट हुए। 
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सभास्थल पर फटा भाजपा नेता का कुर्ता 
जया प्रभा इंटर कॉलेज में राहत वितरण के समय वरिष्ठ नेता राकेश श्रीवास्तव समर्थकों के साथ पहुंच गए। सीट नहीं खाली होने पर डी घेरे के कोने में खड़े हो गए। तभी एक सीओ पहुंचकर हटाने लगे। पुलिस के अभद्र व्यवहार से खफा राकेश श्रीवास्तव अपनी बात कहते कि नोकझोंक शुरू हो गई। इसमें उनका कुर्ता भी फट गया। मंचासीन भाजपा जिला अध्यक्ष समझाने लगे तो उन्हें भी बैठे रहने की सलाह दी। मुख्यमंत्री के सामने हंगामा देखकर एसपी और अन्य अफसरों ने किसी तरह उन्हें शांत कराया। 
बंधे पर आकर करते हैं राजनीति 
कटरिया-चांदपुर के लोगों ने सीएम से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर जमकर भड़ास निकाली। गांव के राम बुझारत, धर्मराज, प्रदीप कुमार, चंद्र शेखर, मालती देवी, सुखदेव ने कहा कि जब बंधे की मरम्मत का समय रहता है तो उस समय सभी जनप्रतिनिधि दिखाई नहीं पड़ते और जब बाढ़ आती है तो बंधे पर आकर वोट की राजनीति करते हैं। इन्हें हमारे दर्द से कोई वास्ता नहीं अब सीएम को सुनाना था तो कोई सुनता ही नहीं। 
विधायकों की होर्डिग्स आग के हवाले 
ग्रामीणों ने सीएम और विधायक का होर्डिंग भी तोड़कर आग के हवाले कर दिया। कटरिया-चांदपुर के गांववालों ने सड़क पर जमकर बवाल किया। ईंट और गोबर चलाए। एक विधायक के काफिले में गाड़ी का शीशा भी टूट गया। मुख्यमंत्री, प्रदेश सरकार, विधायकों और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे। मुख्यमंत्री के चित्र पर गोबर पोत दिया। महिलाओं ने रास्ते से गुजर रहे किसी विधायक की गाड़ी पर भी पथराव भी किया। 
सीएम के जाने के बाद पुलिस ने भांजी लाठी 
सीएम के जाने के बाद पुलिस ने कटरिया-चांदपुर गांव के लोगों का लाठियों से ख्याल किया। आरोप है कि बूढ़े जवान, बच्चों और महिलाओं को दौड़ाकर पीटा। एक पुलिस अधिकारी ने तो सारी सीमाएं तोड़कर महिला का हाथ पकड़कर जबरन धक्का दे दिया। इसकी चर्चा भी जबरदस्त रही। ग्रामीणों का कहना था कि बाढ़ से हमारा परिवार मर ही रहा है। कुछ भी हो उसका परवाह नहीं है। 
पुलिस वाले भी हुए भीड़ का शिकार 
मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन की ओर से की गई तमाम व्यवस्थाएं उस समय ध्वस्त हो गईं जब महिलाएं सड़क पर मोर्चा संभाल लीं। सभास्थल से डेढ़ किलोमीटर तक सड़क के दोनों तरफ बाढ़ पीड़ितों एवं दूर-दराज से आए ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही। सीएम का काफिला गुजरने के बाद सांसद-विधायकों का जब काफिला पहुंचा तो वाहनों को रोकना चाह रहीं महिलाएं नहीं रुकने पर ईंट, रोड़े चलाने लगीं। जब तक सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी समझ पाते भारी भीड़ के चलते लोगों में भगदड़ मच गई। एक दर्जन पुलिसकर्मियों को भी महिलाओं के आक्रोश का शिकार होना पड़ा।
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