संवाद न्यूज एजेंसी
कप्तानगंज (बस्ती)। अधिवक्ता चंद्रशेखर यादव का अपहरण कर हत्या करने के मामले में पुलिस अब तक मास्टरमाइंड संदीप यादव उर्फ मोनू तक नहीं पहुंच पाई है।
वारदात में इस्तेमाल उस वाहन को भी बरामद नहीं किया जा सका है जिससे अधिवक्ता का अपहरण किया गया था। हर्रैया पुलिस, स्वाॅट और एसओजी की टीम पांच दिन बाद भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
मास्टरमाइंड और वारदात में इस्तेमाल वाहन को खोजने के लिए पुलिस का ताना-बाना कारगर साबित नहीं हो पा रहा है। इससे पुलिस की किरकिरी होने लगी है। खबर है कि पुलिस आरोपियों को पकड़ने के लिए अब दूसरा तरीका इजाद कर रही है। सूत्रों की मानें तो फरार मास्टरमाइंड एवं अन्य आरोपियों के बचाव में कुछ जनप्रतिनिधियों का नाम आ रहा है। ऐसे में पुलिस की नजर जनप्रतिनिधियों के कुछ प्रमुख ठिकानों पर भी है।
वारदात के बाद से पुलिस टीमें महराजगंज, चौकड़ी, बड़ेबन टोल प्लाजा सहित कई अन्य ठिकानों पर सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल चुकी है। मगर, पुलिस कुछ भी बताने से परहेज कर रही है। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी काली स्कार्पियो से किस तरफ भागे, पुलिस इसका खुलासा नहीं कर रही है। चर्चा है कि वारदात के बाद पकड़े गए रंजीत यादव और उसके ममेरे भाई सोहित उर्फ विनय से पुलिस ने गहन पूछताछ की है। सीओ हर्रैया संजय सिंह ने बताया कि मास्टरमाइंड सहित अन्य की तलाश की जा रही है।