संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सीधे-सपाट मामलों को सुलझाकर अपनी पीठ खुद थपथपा लेने वाली पुलिस का उलझे प्रकरण सुलझाने का ट्रैक रिकाॅर्ड काफी खराब है। जैसे ही कोई उलझा मामला आता है पुलिस उसे सुलझाने की जगह उसमें खुद उलझ जाती है।
ऐसे मामलों की फेहरिस्त काफी लंबी है। वाल्टरगंज के धौरहरा गांव का जामवंत प्रकरण, मुनियांव के अंगद के सात माह से लापता होने और कप्तानगंज क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय में छात्रा की हत्या कर शव लटकाने का मामला अभी ताजा है। इन तीनों मामलों में पुलिस की कोई तरकीब काम नहीं आ रही है।
जानकारी के अनुसार, 10 फरवरी को कप्तानगंज थाना क्षेत्र के एक गांव की छात्रा की हत्या कर उसके घर के बगल स्थित कंपोजिट विद्यालय के कमरे में शव लटका दिया गया था। पहले चर्चा हुई कि घर से किसी बात पर डांट पड़ने के बाद उसने खुदकुशी कर ली। बाद में पिता और परिवार के लोगों ने यह कहकर मामले को उलझा दिया कि उसकी बेटी की मौत बीमारी से हुई है।
पिता ने उसके शव को जला देने का बयान दिया। बाद में शव को मनवर नदी के किनारे जमीन से बरामद किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत फंदे से लटकने से नहीं, बल्कि चोट की वजह से होना पाया गया। सिर, चेहरे पर गंभीर चोट और सिर के नीचे की हड्डी टूटी पाई गई।
उसके अंदरूनी हिस्से से भी हैवानियत के लक्षण पाए गए। इसकी पुष्टि के लिए स्लाइड जांच के लिए भेजी गई है। बाद में छात्रा के पिता की तहरीर पर पुलिस ने हत्या का केस तो दर्ज कर लिया, मगर तफ्तीश आगे नहीं बढ़ा पा रही है। वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के धौरहरा निवासी जामवंत का मामला और भी पेचीदा हो गया है। उसके बंद पड़े स्कूल में नौ दिसंबर 24 को एक जला हुआ शव मिला था। पास में चाभी और चप्पल मिलने की वजह से परिवार के लोगों ने उसे जामवंत का शव मान लिया था।
पुलिस को संदेह हुआ और डीएनए का नमूना जांच के लिए भेजा गया। उसकी चौकाने वाली रिपोर्ट में जला हुआ शव जामवंत का नहीं पाया गया। इसके बाद पुलिस की छानबीन ठप पड़ गई है।