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Basti News: डीएम की फर्जी आईडी बनाने वाले मुगलसराय से गिरफ्तार, लोगों को भेजते थे फ्रेंड रिक्वेस्ट

Thu, 01 Feb 2024 04:37 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती।

सार

पुलिस की पूछताछ में दोनों ने बताया कि वह लोग बेरोजगार हैं। जितेंद्र गिरि ने बताया कि खाली बैठे रहने पर वह पिंटू पासवान से अलग-अलग नामों से लोगों की फेसबुक आईडी बनवाता है। उस प्रोफाइल पर अधिकारियों, संभ्रांत लोगों की फोटो लगा देता है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बस्ती जिले में परिक्षेत्रीय साइबर थाने की टीम ने चंदौली जिले के मुगलसराय से दो ऐसे साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों के नाम की फेसबुक आईडी बनाकर दूसरों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते थे। दोनों के पास से फर्जी आधार कार्ड व अन्य अभिलेख बरामद किए गए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे बड़े लोगों सो संपर्क बनाने के लिए अधिकारियों की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं। ताकि उनके नाम पर बाद में रुपये मांग सकें।

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पिछले कुछ महीने में कई अधिकारियों का फर्जी फेसबुक आईडी बनाने का मामला प्रकाश में आ चुका है। पिछले हफ्ते जिलाधिकारी बस्ती की फोटो लगाकर एक फर्जी आईडी बना ली गई थी। जिससे कई लोगों को रिक्वेस्ट भेजी गई। डीएम की फोटो लगी आईडी से जिसके पास भी रिक्वेस्ट गई वह हैरान था। जानकारी होने पर साइबर थाने में आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया।

एडिशनल एसपी ओपी सिंह ने बताया कि प्रभारी निरीक्षक विकास यादव, एसआई अवधेश कुमार यादव, हरेन्द्र चौहान, महेंद्र यादव, हेड कांस्टेबल राजेश यादव, मनोज राय, मणींद्र प्रताप चंद आदि की टीम बनाकर खुलासे के लिए लगाया। टीम ने तकनीकी उपायों ने छानबीन करते हुए आईडी बनाने वालों की पहचान की और चंदौली जनपद के मुगलसराय से जितेंद्र गिरी उर्फ पंकज गिरि व पिंटू पासवान को बुधवार को धर दबोचा। दोनों चंदौली जिले के अलीनगर थाने के परशुरामपुर सिकटिहा निवासी हैं।
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खाली समय में बनवाता है फर्जी आईडी
पुलिस की पूछताछ में दोनों ने बताया कि वह लोग बेरोजगार हैं। जितेंद्र गिरि ने बताया कि खाली बैठे रहने पर वह पिंटू पासवान से अलग-अलग नामों से लोगों की फेसबुक आईडी बनवाता है। उस प्रोफाइल पर अधिकारियों, संभ्रांत लोगों की फोटो लगा देता है। ऐसा करने के पीछे बड़े व अमीर लोगों से फेसबुक फ्रेंडशिप करना उनका उद्देश्य होता है। ताकि बाद में उनसे रुपये आदि मांग सके। अपनी पहचान छिपाने के लिए दूसरे के नाम का फर्जी आधार कार्ड भी बनवाकर रखते हैं।

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