आंगनबाड़ी कार्यकत्रियो ने विकास भवन का घेराव करते किया प्रर्दशन।
महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मांगो को लेकर सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया किया। इस दौरान शहर में रैली निकाली और कंपनी बाग चौराहे पर पहुंच विभागीय निदेशक का पुतला फूंका। रैली कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचकर सभा में तब्दील हो गई। रैली के कारण शहर में जाम की स्थिति बन गई थी।
सोमवार को एपीएन पीजी कालेज परिसर में जिले भर से बड़ी संख्या में महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एकत्रित हुईं। कलेक्ट्रेट में आयोजित सभा में महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के मंडल अध्यक्ष शिवसागर पांडेय ने कहा कि पहली मई को मुख्यमंत्री ने जो वादा किया था वह आज तक पूरा नहीं किया। कई बार आंदोलन के बाद समझौता हुआ, मगर सरकार ने कभी भी समझौते का पालन नहीं किया।
जिलाध्यक्ष रतनबाला श्रीवास्तवा ने कहा कि सरकार महंगाई की दुहाई देती है, मगर जब सांसदों व विधायकों के वेतन बढ़ाने और सरकारी कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने की बात आती है तो महंगाई की बात भूल जाती है। कहा कि महिला आंगनबाड़ी कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए और महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 18 हजार और सहायिका को नौ हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। जिला ट्रेड यूनियन कौसिंल के महासचिव कामरेड के के श्रीवास्तव ने कहा कि केंद्र और प्रदेश, दोनो सरकारें कर्मचारी और मजदूर विरोधी है।
]जिला मंत्री मिथलेश पांडेय ने कहा कि विभागीय कार्यों के अलावा अन्य विभागों के कार्य नहीं करेंगे। अंत में पीएम को संबोधित नौ सूत्रीय ज्ञापन जिला प्रशासन को दिया गया। इस मौके पर रानी सिंह, चंद्रप्रभा यादव, सरोज शुक्ला, उर्मिला त्रिपाठी, सरला चौधरी, कुसुम चौधरी, उषा शर्मा, विमला देवी, आशा सिंह, सुनीता सिंह, अनीता पांडेय, यशोदा आदि रहे।