बस्ती। गौर विकास खंड के सिक्टा ग्राम पंचायत में अपात्रों के बीच शौचालय
की धनराशि वितरण के मामले में प्रधान और सेक्रेटरी को दोषी पाया गया है। इन
दोनों ने शो काज नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं दिया है। डीएम अनिल कुमार
दमेले ने दोनों से अपात्रों में वितरित एक लाख 20 हजार रुपये भू राजस्व
बकाए की भांति वसूली और पंचायत सेक्रेटरी को निलंबित करने का आदेश दिया है।
सिक्टा
गांव के राजसेन पांडेय, ओमप्रकाश शुक्ल आदि ने ग्राम पंचायत में स्वच्छ
भारत मिशन के तहत निर्मित कराए जाने वाले शौचालयों के लिए धनराशि न देने की
शिकायत की थी।
इसकी जांच डीएम ने जुलाई 2015 में डीपीसी विष्णुदेव
तिवारी और राजाशेर सिंह से कराई तो पता चला कि गांव के अपात्रों में
शौचालय की धनराशि बांट दी गई।
शौचालय निर्माण की धनराशि को
एकाउंटपेयी चेक से न देकर नकद देने के मामले में प्रथम दृष्ट्या प्रधान और
पंचायत सेक्रेटरी दोषी पाए गए थे। इन दोनों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। 26
जुलाई को प्रधान और 11 अगस्त पंचायत सेक्रेटरी का स्पष्टीकरण मिलने के बाद
मामला ठंडे बस्ते पड़ा रहा।
चार जनवरी को डीएम ने पत्रावली देखी।
दोनों का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिला। 10 अपात्रों को शौचालय के लिए एक
लाख 20 हजार रुपये बांटने के मामले में दोनों को दोषी ठहराते हुए तत्कालीन
पंचायत सेक्रेटरी महमूद अता को निलंबित करने के साथ ही ग्राम प्रधान और
तत्कालीन पंचायत सेक्रेटरी महमूद अता से भू राजस्व की भांति सरकारी धन की
वसूली का आदेश दिया है। प्रधान से 60,000 रुपये और सेक्रेटरी से 60,000
रुपये वसूलने का आदेश डीएम ने दिया है।