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Basti News: पदमश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद पहुंचे मुंडेरवा, हुआ स्वागत

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जूनियर हाईस्कूल अहरा में पहुंचे पदमश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद का स्वागत करते ​शिक्षक। संवाद
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मुंडेरवा। पद्म श्री पुरस्कार प्रो. डॉ. राजेंद्र प्रसाद सोमवार को अपनी जन्मभूमि मुंडेरवा पहुंचे। यहां उनका जोरदार स्वागत किया। मुंडेरवा कस्बे के मूल निवासी डॉ. राजेंद्र गोरखपुर एम्स में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लेने जा रहे थे। मुंडेरवा कस्बे में पहुंचने के बाद वह रुक गए। कस्बे के लोगों ने उनका फूल माला से स्वागत किया। इस दौरान जूनियर हाईस्कूल अहरा में बच्चों को देख उन्हें अपना बचपन याद गया।
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प्रो. डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बच्चों और शिक्षकों से संवाद के दौरान अपने छात्र जीवन का अनुभव साझा किया। कहा कि वर्ष 1964 से लेकर 1966 तक जूनियर स्तर की पढ़ाई उन्होंने कस्बे में रहकर इसी विद्यालय से पूरी की। इसके बाद हाई स्कूल एवं इंटरमीडिएट की पढ़ाई हीरालाल इंटर कॉलेज खलीलाबाद से तथा मेडिकल की पढ़ाई लखनऊ से किया। उन्होंने कहा कि अब समय बदल गया है। परिवार और सरकार दोनों पढ़ाई पर विशेष ध्यान दे रही है।
कहा हमारे समय में मेडिकल की पढ़ाई के बारे में मुंडेरवा जैसे ग्रामीण क्षेत्र में बहुत कम लोग जानते थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता स्व. गोपीचंद कपड़े के अच्छे व्यवसायी थे। उनका व्यवसाय भी ठीक-ठाक चल रहा था। पिता जी ने उन्हें और उनके बड़े भाई डॉ. बलभद्र एमबीबीएस की पढ़ाई कराई। उन्होंने कहा कि छोटे कस्बे में रहने और व्यवसायी परिवार से ताल्लुक रखने के बाद भी पिता जी में शिक्षा के प्रति जागरूकता थी। कहा कि यदि माता-पिता तथा गुरु चाहे तो बच्चे को तराश कर हीरा बना सकते हैं।
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इस मौके पर प्रधानाचार्य अशोक कुमार मौर्या, आशुतोष पांडेय, आशा त्रिपाठी, मृदुला मिश्रा, कंचन चौधरी, महेंद्र जायसवाल, शकुंतला यादव, प्रियंका, विजय लक्ष्मी, केशवराम, मनीष मोदनवाल, नरोत्तम मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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राष्ट्रपति ने दिया था पदमश्री पुरस्कार
श्वसन चिकित्सा/पल्मोनरी मेडिसिन क्षेत्र के विशेषज्ञ प्रो. डॉ. राजेंद्र प्रसाद को चिकित्सा जगत में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2026 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पदमश्री पुरस्कार से नवाजा है। इसके पहले पूर्व राष्ट्रपति स्व. एपीजे अब्दुल कलाम ने डाॅ. बीसी राय राष्ट्रीय पुरस्कार और पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने वर्ष 2016 में राष्ट्रीय पुरस्कार से उन्हें नवाजा था। डॉ. राजेंद्र टीबी मुक्त भारत अभियान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयास देश के 700 मेडिकल काॅलेजों को इस कार्यक्रम से जोड़ा जा चुका है। उन्होंने अपने चिकित्सा कॅरियर में 600 शोध पत्र और 17 पुस्तकें भी लिखी है। वह केजीएमयू के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष, दिल्ली स्थित बल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के निदेशक और उत्तर प्रदेश ग्रामीण आर्यु विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान सैफई के निदेशक पद को सुशोभित कर चुके हैं।
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