संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रवैया यूं ही नहीं सख्त हुआ है। पालतू कही जाने वाली इस प्रजाति ने वाकई आतंक मचा रखा है। सूंघते-भौंकते समय कब ये नोच डालें, कहना मुश्किल है। कई बार आदमखोर जानवर की तरह व्यवहार करते हैं।
डेढ़ महीने पहले ही बाग में आम बीनने गई भानपुर तहसील के टेढ़ी कुइयां गांव में 10 साल की मासूम को ऐसे ही आवारा कुत्तों ने नोचकर मार डाला था। इतना ही नहीं दो महीने पहले मुंडेरवा में कुत्तों के दौड़ाने पर भाग रहे पल्लेदार की वाहन से कुचलकर मौत हो गई थी। मांस और खून की इनकी तलब इतनी बढ़ गई है कि पक्षियों पर भी हमला करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। मंगलवार को सुबह महराजगंज के पास राष्ट्रीय पक्षी मोर पर कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई।
आंकड़ों पर गौर करें तो 15 दिनों में कुत्तों ने 228 लोगों को काटा है। आलम यह है कि रोजाना आवारा कुत्तों के काटने से घायल होकर लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। जानकार बताते हैं कि इस मौसम में आवारा कुत्ते और अधिक घातक हो जाते हैं। गर्मी बढ़ने के साथ-साथ आवारा कुत्तों के हार्मोंस में भी बदलाव होता है। 15 दिन पहले वाल्टरगंज क्षेत्र के कटहापुर और बढ़या गांव में एक पागल कुत्ते ने छह लोगों और एक भैंस को काट लिया था।
अप्रैल में कप्तानगंज रेंज के रतास गांव में राम प्रसाद चौधरी के खेत में कुत्तों के झुंड ने दो हिरनों को काटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। दोनों की बाद में मौत हो गई थी। जिला अस्पताल की ओपीडी में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की लाइन लगी रहती है।
सीएमओ डॉ. राजीव निगम बताते हैं कि जिला अस्पताल में 100 से 120 वैक्सीन रोजाना लग रही, जिसमें कुत्ते की संख्या अधिक है। सीएचसी पर भी चार से पांच लोगों को रोजाना रैबीज लग रही है। 2200 वायल उपलब्ध है। एक वायल में पांच लोगों को वैक्सीन लगती है। निर्देश दिए गए हैं कि जो भी मरीज पहुंचे उन्हें जरूर वैक्सीन लगाएं। बहानेबाजी न करें।