- कागज में कार्रवाई, धरातल पर नहीं बदल रही स्थिति
- निलंबन, स्थानांतरण का आदेश का नहीं हो रहा अनुपालन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बीएसए का आदेश बेअसर साबित हो रहा है। विद्यालयों के निरीक्षण में मिल रही खामियों के बाद की जा रही कार्रवाई कागजी कोरम बनकर रह जा रही है। निलंबन और स्थानांतरण जैसे आदेश का भी अनुपालन नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।
विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल सृजित करने के लिए बेशिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कवायद रंग नहीं ला पा रही है। निचले पायदान पर उनकी सख्ती का असर नहीं है। ऐसे कई मामले इसकी गवाही दे रहे हैं। विद्यालयों का निरीक्षण हुआ। खामियां उजागर हुई। बीएसए और खंड शिक्षाधिकारियों के स्तर से कार्रवाई भी हुई, मगर इसे मानने को संबंधित लोग तैयार नहीं हो रहे हैं। इससे माहौल सुधरने के बजाय बिगड़ने लगा है। कार्रवाई के बाद अनुपालन न होने पर जिम्मेदार भी चुप्पी साध ले रहे हैं। कुछ दिन बीतने के बाद उन्हें अपनी कार्रवाई से ही समझौता करना पड़ रहा है।
सदर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बहलोलवा में तैनात सहायक अध्यापक शिखा सिंह ने खुद प्रधानाध्यापक इंदू कुमारी की शिकायत की। उनका आरोप था कि प्रधानाध्यापक स्टॉफ उपस्थिति पंजिका, पत्र व्यवहार पंजिका ताले के अंदर बंद करके रखा जाती हैं। इसके अलावा उनके द्वारा स्टॉफ का मानसिक उत्पीड़न किया जाता है। बीएसए बीईओ रामनगर से मामले की जांच कराई। यहां नामांकित 47 छात्रों के सापेक्ष सात बच्चे मौजूद मिले। पता चला कि इस विद्यालय के पंजीकृत बच्चे कहीं और पढ़ाई कर रहे हैं। इस खामियों के चलते बीएसए ने संबंधित प्रधानाध्यापक को निलंबित कर उच्च प्राथमिक विद्यालय नगहरा से संबंद्ध किए जाने का आदेश जारी किया। किंतु संबंधित प्रधानाध्यापक एक सप्ताह बीतने के बाद भी संबंद्ध विद्यालय पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया।
प्रकरण सदर ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय डारीडीहा का है। यहां एडी बेसिक के निरीक्षण में मिड-डे-मील में अनियमितता उजागर हुई थी। इसके विद्यालय के रखरखाव एवं रंगाई- पुताई के कार्य भी संतोषजनक नहीं पाए गए थे। एडी बेसिक के निर्देश पर इंचार्ज महिला प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दूसरे विद्यालय से संबद्ध किया गया था। दो महीने के भीतर ही संबंधित शिक्षक को बहाल कर दिया गया। मगर, उनके द्वारा स्वास्थ्य कारणों से अवकाश पर जाने का मामला सामने आया है।
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कोट
जिन शिक्षकों का निलंबन कर दूसरे विद्यालय से संबद्ध किया गया है, उन्हें तत्काल संबंधित विद्यालय पर जाकर अपनी ड्यूटी सुनिश्चित करनी है। यदि कोई मनमानी कर रहा है तो बीईओ से इसकी रिपोर्ट मंगाई जाएगी। सत्यता मिली तो संबंधित शिक्षकों का वेतन रोक दिया जाएगा।
अनूप कुमार, बीएसए