बस्ती। जिले में अब तक करीब 35 प्रतिशत गन्ना खेतों की ही डिजिटल मैपिंग हो सकी है। बड़ी संख्या में खेतों की मैपिंग अभी बाकी है। विभाग ने किसानों को 30 सितंबर तक प्रक्रिया पूरी कराने का मौका दिया है। मैपिंग से खेत छूटने पर अभिलेखों में गन्ने का रकबा कम दर्ज हो सकता है, जिसका असर आगे गन्ने की तौल पर पड़ सकता है।
जिले में इस बार करीब 62 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की फसल बोई गई है। इसमें करीब 1.12 लाख किसान शामिल हैं। शासन के निर्देश पर सभी किसानों के खेतों की डिजिटल मैपिंग कराई जा रही है। इसके लिए खतौनी और आधार के माध्यम से किसान और खेत के विवरण का मिलान किया जा रहा है। डिजिटल मैपिंग में सबसे अधिक दिक्कत उन किसानों को हो रही है, जिनके खेत गांव में हैं और निवास स्थान दूसरे स्थान पर है। ऐसे किसान समय से खेत से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। इससे कुछ खेत सर्वे और मैपिंग से छूट गए हैं।
विभाग के अनुसार मैपिंग में खेत शामिल नहीं होने पर अभिलेखों में संबंधित किसान का गन्ना रकबा कम दर्ज हो सकता है। इससे भविष्य में गन्ने की तौल को लेकर परेशानी हो सकती है। किसानों से अंतिम तिथि का इंतजार न करने की अपील की गई है।
पर्यवेक्षक से संपर्क कर पूरी कराएं प्रक्रिया
जिन किसानों के खेतों की डिजिटल मैपिंग नहीं हुई है, वे संबंधित गन्ना पर्यवेक्षक से संपर्क कर खतौनी उपलब्ध कराएं और खेत को सर्वे में शामिल कराते हुए मैपिंग पूरी कराएं।
वर्जन
किसी भी किसान को डिजिटल मैपिंग में परेशानी हो तो संबंधित गन्ना पर्यवेक्षक से संपर्क करें। आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराकर प्रक्रिया पूरी कराई जा सकती है। 30 सितंबर तक मैपिंग चलेगी। इसके बाद पोर्टल दोबारा खुलने पर छूटे खेतों की मैपिंग कराई जाएगी।
- जगभान सिंह भदौरिया, जिला गन्ना अधिकारी, बस्ती