बस्ती। मार्च क्लोजिंग की आपाधापी खत्म करने में आखिरी दिन 31 मार्च को सरकारी कार्यालयों में अधिकारी-कर्मचारी जूझते नजर आए।
ईद की सार्वजनिक छुट्टी होने के बाद भी प्रमुख बैंक शाखाएं, जिला कोषागार कार्यालय के अलावा भारी भरकम बजट पाने वाले आधा दर्जन विभाग सुबह से देर शाम तक खोले रखे गए। इस दौरान आखिरी क्षण तक बजट बचाने की जोर आजमाइश विभागों में होती रही।
देर शाम तक ट्रेजरी कार्यालय में विभिन्न विभागों की ओर से प्रस्तुत फाइलों पर 50 करोड़ से अधिक भुगतान किया जा चुका था।
मार्च क्लोजिंग के दिन सोमवार को देर शाम तक भुगतान की प्रक्रिया चलती रही। जिन विभागों की तरफ से अलग- अलग मदों में भुगतान संबंधी फाइल आखिरी समय तक तैयार कर ली गई उसमें उपलब्ध बजट काफी हद तक खप गया।
बजट खपाने के लिए ट्रेजरी कार्यालय में विभिन्न विभागों की ओर से प्रस्तुत भुगतान संबंधी फाइलों की लंबी फेहरिस्त थी। संबंधित पटल के बाबू और अधिकारी सुबह से देर शाम तक एक- एक फाइल का मिलान और अवलोकन कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने में व्यस्त दिखें।
लेखा संवर्ग के कर्मचारी दिन भर बजट बचाने के चक्कर में माथा पच्ची करते नजर आए। फाइलों को तैयार करने में यदि कहीं जल्दबाजी में त्रुटि नजर आई तो उसे तत्काल दूर किया गया।
ट्रेजरी कार्यालय में सुभाष चंद्र दुबे, आलोक श्रीवास्तव, अखिलेश पाठक, मिर्जाकांत, शशिकांत, सूरज, रवि, सीमा, सोनल, प्रिंस, सौरभ केसरवानी आदि कर्मचारियों ने कामकाज निपटाने में अहम भूमिका निभाई।