बस्ती। मुंडेरवा स्थित अमृत
नर्सिंग होम में इलाज के दौरान तबीयत और बिगड़ने पर हुई महिला की मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है, ऐसे में विसरा सुरक्षित रख लिया गया है। अब आगे की रिपोर्ट पर कार्रवाई आकर अटक गई है। वहीं, जांच के लिए सीएमओ ने अलग से एक कमेटी बना दी है।
बता दें कि मुंडेरवा कस्बे के लोहदर निवासी अनिल कुमार चौधरी की पत्नी रोशनी की 14 मई रात 12 बजे अचानक शरीर में खुजली की शिकायत हुई थी। पीड़ित अनिल ने बताया कि बगल के अमृत नर्सिंग होम में ले जाकर भर्ती किए। वहां मौजूद नर्स ने बिना चिकित्सीय सलाह के ताबड़तोड़ तीन इंजेक्शन लगा दी। तहरीर में आरोप था कि तीसरे इंजेक्शन के बाद मुंह से झाग निकल आया और हालत बिगड़ते ही स्टाफ घबरा गए। तत्काल मरीज को बाहर भेज दिए, बाद में मौत हो गई।
शव लेकर अस्पताल पहुंचे तो वहां से स्टाफ फरार हो गए। इसके बाद परिजनों सड़क जाम कर हंगामा किया। मामले में पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। शनिवार को आई रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। इसके बाद विसरा सुरक्षित करते जांच के लिए गोरखपुर भेज दिया गया है।
मामले में पुलिस अब तक नामजद संचालक और डॉक्टर व स्टाफ पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, ऐसे में विसरा सुरक्षित कर लिया गया है। मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
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मौत से टूट गया परिवार, बिलख रहे बच्चे
रोशनी की मौत से परिवार टूट गया। पति अनिल कुमार चौधरी का कहना है कि दो छोटे-छोटे बच्चों को कैसे संभाला जाएगा। घर की रोशनी का जाना अंधेरा जैसा छा गया है। बच्चे अपनी मां के आने की राह देख रहे हैं, मगर रोशनी नहीं आएगी। बच्चे मां के लिए बिलख रहे हैं तो अन्य परिवार गम में हैं। वहीं, लोग घर पर पहुंचकर ढांढ़स बढ़ा रहे हैं।
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जांच कमेटी गठित, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
महिला की मृत्यु प्रकरण की जांच सीएमओ की ओर से गठित तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने बताया कि जांच टीम में डिप्टी सीएमओ डॉ. एसबी सिंह, डॉ. बृजेश शुक्ल और डॉ. पवन कुमार को शामिल किया गया है। तीन दिन में जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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तेज खुजली से गले की नसें भी होती हैं प्रभावित
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. राम अनुग्रह का कहना है कि नॉर्मल खुजली यदि शरीर में है तो एविल और डेक्सोना इंजेक्शन से कवर किया जा सकता है। वहीं, अत्याधिक खुजली होने पर यदि पूरे शरीर में लाल चक्कते निकल आते हैं तो वही खुजली शरीर के अंदर भी फैलता है। अक्सर गले की नस को प्रभावित कर देती है। यह फूलता है तो नसें प्रभावित होने लगती हैं यानी अवरोध, इससे सांस रुकने लगती हैं। नस अंदर फूलता है तो सांस लेने में तकलीफ होती है। ऐसे केस आर्टीकेरिया एवं एंजीओ एडीमा (नसें फूल जाना) की श्रेणी में आते हैं। इससे सांस रुकने की संभावना होती है, मौत भी हो सकती है।
कोट
नर्सिंग होम में महिला की मौत प्रकरण में कमेटी की जांच रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मौके पर अस्पताल में कोई जिम्मेदार व्यक्ति, डॉक्टर नहीं मिले ऐसे में बीएचटी की जांच नहीं हो पाई।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।