बस्ती। जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने नौ वर्षों में महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। इस पहल से 27,833 महिलाएं ''लखपति दीदी'' बन चुकी हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं। साथ ही खुद को स्वरोजगार से जोड़कर परिवार का सहारा बन चुकी हैं।
नव निर्माण के नौ वर्षों में बस्ती जनपद में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने महिलाओं के जीवन में अभूतपूर्व बदलाव लाने का कार्य किया है। आर्थिक सशक्तिकरण की इस मुहिम ने हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें लखपति दीदी के रूप में नई पहचान दी है। जिले में अब तक 27,833 महिलाएं इस मुकाम को हासिल कर चुकी हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव का मजबूत संकेत है।
डीसी एनआरएलएम आशादेवी के अनुसार, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बस्ती में बड़े पैमाने पर स्वयं सहायता समूहों का गठन कराया गया। कुल 11228.7 लाख रुपये की लागत से 16,041 स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को संगठित किया गया। यह समूह न केवल सामाजिक एकजुटता को मजबूत किया, बल्कि महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का भी प्रभावी माध्यम भी बने।
समूहों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने के लिए 13,958 स्वयं सहायता समूहों को 2252 लाख रुपये का रिवाल्विंग फंड उपलब्ध कराया गया। इससे समूहों को छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू करने, बचत बढ़ाने और आपसी ऋण व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिली। इसके साथ ही 13,384 समूहों को 1553 लाख रुपये का सामुदायिक निवेश फंड प्रदान किया गया, जिससे महिलाओं ने डेयरी, पशुपालन, सिलाई-कढ़ाई, खाद्य प्रसंस्करण, किराना और अन्य लघु उद्यमों के जरिए अपनी आय बढ़ाई।
कोट
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बस्ती में 27,833 महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। 16,041 स्वयं सहायता समूह गठित है। वित्तीय सहायता भी प्राप्त कर चुकी हैं। प्रशिक्षण के जरिये महिलाओं को विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जा रहा है।
-आशा देवी, डीसी, एनआरएलएम, बस्ती।