अभी राहत नहीं, पूरे हफ्ते कड़ाके की ठंड के आसार
बस्ती। दस जनवरी से मध्य फरवरी के बीच कड़ाके की ठंड पड़ने का मौसम विज्ञानियों का पूर्वानुमान हकीकत में तब्दील होता दिख रहा है। हिमालय छूकर आ रही सर्द हवाओं ने संकेत दे दिया है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण बादल घिर गए हैं। वातावरण में मौजूद भरपूर आर्द्रता ने कोहरे का रूप लेकर ठंडी के मौसम की तासीर बदल कर रख दी।
सड़क पर दृश्यता काफी कम होने से वाहनों के आवागमन में काफी दिक्कत हो रही है। लगातार तीसरे दिन भी कोल्ड वेब की तरह उत्तर-पश्चिम हवा चलती रही और धूप नहीं निकली। इससे अधिकतम व न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 19 और न्यूनतम साढ़े पांच डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विभाग की तरफ से जारी पूर्वानुमान के मुताबिक, आने वाले सप्ताह में भी सर्दी के सितम से राहत के आसार कम हैं। बादल छंटने के बाद अधिकतम तापमान में तीन से चार डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे लोगों को काफी राहत मिलेेगी। विभाग के मौसम विज्ञानी डॉक्टर अमरनाथ मिश्र के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ के कारण बादलों का बनना जारी है। वातावरण में काफी नमी भी है। इस लिए फिलहाल सर्दी से राहत के आसार कम हैं।
जबरदस्त ठंड के बीच आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित रहा। ठंड का असर यह है कि शुक्रवार को शाम ढलने के साथ ही सड़कों पर आवाजाही कम होने लगी। बाजारों में भी भीड़ कम दिखी। जो लोग दिखे भी, वे मफलर, जैकेट और गरम कपड़ों से लदे मिले। दुकानों पर भी खरीददारों की संख्या कम ही नजर आई। कई स्थानों पर लोगों ने अपने प्रयास से अलाव का प्रबंध कर ठंड से राहत पाने की कोशिश की। खासकर सब्जीमंडी में किसान व व्यापारी कम आए। रोडवेज पर यात्रियों, कचहरी में मुवक्किलों व दफ्तरों में कर्मचारियों फरियादियों की संख्या भी प्रभावित रही। कुछ जगह मकर संक्रांति का त्योहार शुक्रवार को मनाया गया। कुआनो नदी के अमहट, मोहटा, लालगंज, सरयू के टांडा-कलवारी, नौरहनी घाटों पर अपेक्षा से कम श्रद्घालु पहुंचे।
पिछले वर्ष भी मकर संक्राति के बाद ठंड बढ़ गई थी। 2020 के 15 से 31 जनवरी के बीच औसत तापमान छह डिग्री और अधिकतम 20 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि इस बार ला-नीना चक्रवात की वजह से ठंड ज्यादा पड़ने के संकेत हैं।
तापमान गिरते जाने से आलू, मटर, अरहर जैसी फसलों व सब्जियों में नुकसान की आशंका व्यक्त की गई है। कृषि विज्ञानी डॉक्टर अनिरुद्ध के अनुसार, किसानों को टमाटर, मिर्च, मटर आदि की फसल को पाला से बचाने के लिए उपाय करने चाहिए। दवाओं के छिड़काव अथवा धुंआ, पुआल-भूसा आदि के जरिए तापमान बनाए रखना चाहिएख् ताकि नुकसान न हो।