ठोकर नंबर आठ को भी खतरा पैदा हो गया है।
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घटती नदी आफत बन गई है। जलस्तर कम होने के साथ साथ कई क्षेत्रों में कटान बढ़ गया है। पिपरपाती बांध का ठोकर नंबर चार कटकर नदी की धारा में समा गया। ठोकर नंबर आठ को भी खतरा पैदा हो गया है। बाढ़खंड के इंजीनियर भी हलकान हैं।
पिपरपाती बंधे के पास बसे लोग धीरे धीरे बंधे की कटान की दहशत के आदी होते जा रहे है। कारण पिछले 15 दिनों से चल रही कटान में उतार चढ़ाव से सहन शक्ति बढ़ा दी है। शनिवार सुबह कटान ने जब फिर से रौद्र रूप धारण किया तो बाढ़ खंड के अधिकारियों के भी होश उड़ गए। पिपरपाती बंधे पर सुबह नौ बजे पुरवा हवा आंधी की भांति चली तो पानी की लहरें इतनी तेज हो गईं कि देखते ही देखते स्पर संख्या चार नदी में विलीन हो गया। ठोकर (स्पर) संख्या आठ कटकर महज चार मीटर बचा। स्पर संख्या तीन से चार के बीच तीन मीटर स्लोब कटने के साथ ही एक मीटर बांध भी काट गया। जब नदी की धारा ने पूरा स्लोब काटकर मेन बंधे को काटना शुरू किया तो हाहाकार मच गया। बंधे से सटे दो मोटे शीशम के पेड़ भी देखते देखते पानी में गिर गया। अधिकारियों के प्रयास व रस्से में बंधा शीशम का पेड़ पानी की लहरों को रोकने में मददगार बना। कर्मचारी कुछ राहत की सांस लिए ही थे कि स्पर संख्या दो से तीन के बीच कटान शुरू हो गई । एक बार फिर अफरातफरी मच गई और दो मीटर स्लोब काट गया। फिर स्पर संख्या चार से पांच का भी स्लोब कट गया।यदि हवा का झोंका तेज हुआ तो कटान रोक पाना मुश्किल होगा। कटान से वीडी बांध का पांच सौ मीटर भाग प्रभावित है।
बाढ़ खंड के अवर अभियंता खलील अहमद ने बताया कि सुबह से दो सौ ट्राली बोल्डर सुबह से गिराया जा चुका है। प्रतिदिन 21 ट्रक से अधिक बोल्डर की खपत है। अभी तक बोल्डर पारा से आ रहा था। आज से पिपरपाती रामजानकी मार्ग पर डंप किया जा रहा है। सहायक अभियंता जीतेंद्र कुमार ने बताया कि स्थिति नाजुक होती देख हमने सारे संसाधनों को बचाव कार्य में लगाकर उच्चाधिकारियों को सूचना दे दिया। अभी कटान चल रही है किंतु अब हालात नियंत्रण में है।
बाढ़ जोड़
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फिर बढ़ने लगा जलस्तर
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। घाघरा का जलस्तर बृहस्पतिवार से बढ़ने लगा है। खतरे के निशान से 15सेमी नीचे बह रही नदी भीषण कटान कर रही है। शुक्रवार को जलस्तर 92:520 मीटर से बढ़कर 92:580 मीटर हो गया। तटबंध के गांव कल्याणपुर, भरथापुर, रानीपुर, कठवनिया, भदोई का पुरवा सहित कई गांवों में कटान का खतरा बढ़ता जा रहा है। लोलपुर विक्रमजोत बांध से सटकर बह रही नदी पिछले दो माह से परेशानी का सबब बनी है। गांव वालों के विरोध प्रदर्शन के बावजूद प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। गौरिया नैन बाढ़ चौकी पर लगातार निगरानी करते हुए बाढ़ कार्य खंड के जेई दया शंकर सिंह, ज्ञान प्रकाश जायसवाल, डीके यादव ने बताया कि अब बांध से खतरा टल गया हैं केवल कल्याणपुर व भरथापुर में कटान रुक रुक कर हो रहा है जिसको रोक पाना संभव भी नहीं है।