बस्ती। सीएचसी कुदरहा में स्टाफ नर्स की एक गलती व लापरवाही से नवजात मां के कोख में ही अलविदा कर दिया। लापरवाह सिस्टम के आगे वेवश हुए पीड़ित परिवार को अब भी न्याय नहीं मिल सका है। थाने में तहरीर देने के बाद भी अभी तक प्राथमिकी तक दर्ज नहीं हुई। थक कर अब पीड़ित एसपी के दरबार पहुंचा और प्रार्थना पत्र देकर फिर से न्याय की गुहार लगाते हुए दोषी स्टाफ नर्स पर कार्रवाई की मांग की है।
बता दें कि सीएचसी कुदरहा में जबरन प्रसव के दौरान बच्चे का सिर धड़ से अलग हो गया था। कलवारी थाना क्षेत्र के मुरादपुर निवासी दुर्गा प्रसाद ने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक को पत्र देकर प्रसव के दौरान बच्चे का सिर धड़ से अलग होकर दो हिस्से में बट जाने के मामले में दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। एसपी को दिए पत्र में दुर्गा प्रसाद ने कहा है कि उनकी पुत्र वधू प्रेमा देवी पत्नी नीरज कुमार जो लगभग सात माह की गर्भवती थी और उसके पेट में दर्द होने पर 10 दिन पहले एंबुलेंस से उसे लेकर कुदरहा सीएचसी बनहरा पहुंचे थे।
स्टाफ नर्स कुसुम ने तत्काल दर्द का इंजेक्शन दिया। फिर जोर जबरदस्ती से बच्चा पैदा करने की कोशिश करने लगी कि नवजात दो टुकडों में होकर शरीर निकला लेकिन सिर अंदर ही रह गया। उसके बाद रक्तश्राव तेज हो जाने पर नर्स कुसुम घबरा गई और बगल के मैक्स हाॅस्पिटल में भेजवा दी। जहां मरीज घंटों दर्द से कराहती रही। उसके बाद उन लोगों ने नर्स से रेफर कागज बनाने को कहा तो बना नहीं रही थी।
काफी वाद-विवाद होने पर तब रेफर का कागज कैली अस्पताल बस्ती के लिए बनाया। कैली अस्पताल में प्रेमा देवी का इलाज चल रहा है। दुर्गा प्रसाद ने दोषी नर्स के साथ ही जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग किया है। वहीं, मामले में अभी तक स्टाफ नर्स को सीएचसी कुदरहा से हटाकर टीबी अस्पताल अटैच कर दिया गया है, जबकि जिला स्वास्थ्य समिति ने नर्स की सेवा समाप्ति के लिए संस्तुति भी कर दी है। अब आगे की कार्रवाई शासन स्तर पर टिकी हुई है। मैक्स अस्पताल भी सील हो चुका है।
हालांकि, अभी तक नर्स पर तहरीर के बाद भी स्थानीय पुलिस प्राथमिकी दर्ज नहीं की, इससे पीड़ित परिवार परेशान है। आरोप है कि कथित दलालों के दबाव में अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पा रही है।
कोट
मामले की अभी जांच चल रही है, जब तक सीएमओ की ओर से काई जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं करा दी जाती है, तब तक पुलिस कुछ कार्रवाई नहीं कर सकेगी। स्वास्थ्य विभाग को ही कार्रवाई करनी है।
-संजय सिंह, सीओ, कलवारी, बस्ती।