बस्ती। पिछले 5 दशक से साहित्य साधना में समर्पित आठ पुस्तकाें के रचयिता और दमदार दोहों के जनक 74 वर्षीय डॉ. राम कृष्ण लाल जगमग के रचना संसार और व्यक्तित्व कृतित्व पर शनिवार को प्रेस क्लब सभागार में गोष्ठी के साथ ही राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में डॉ. राम कृष्ण लाल जगमग को राष्ट्रीय साहित्य भाष्कर सम्मान के साथ सम्मानित किया।
साहित्यिक संस्था अदबी संगम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कवि एवं चिकित्सक डाॅ. वीके वर्मा ने ने कहा कि डॉ. जगमग की साहित्य यात्रा स्वयं में विविधता लिए हुए हैं। उनकी कृति ‘चाशनी’ से लेकर किसी की दिवाली किसी का दिवाला’ विलाप खंड काव्य, हम तो केवल आदमी है, सच का दस्तावेज, खुशियाें की गौरैया, बाल सुमन, बाल चेतना, नन्हें मुन्नों का संसार आदि कृतियों में वे कभी हास्य तो कभी गंभीर दर्शन के रूप में आम आदमी की पीड़ा व्यक्त करते हुए उनका प्रतिनिधित्व करते हैं।
शायर विनोद उपाध्याय ने कहा कि डॉ. राम कृष्ण लाल जगमग से नई पीढ़ी बहुत कुछ सीख सकती है। उन्होंने पूरा जीवन साहित्यिक सरकारों को समर्पित कर दिया। बीके मिश्र ने कहा कि डाॅ. जगमग का रचना संसार जन सरोकारों से जहां सीधा जुड़ा है।
कवि सम्मेलन में ताजीर वस्तवी, सलीम बस्तवी, दीपक सिंह प्रेमी, अर्चना श्रीवास्तव, शायर वसीउल हक वसी, मकसूद वस्तवी, अनवार पारसा, जगदम्बा प्रसाद भावुक, हरिकेश प्रजापति, डाॅ. राजेन्द्र सिंह राही, विनोद उपाध्याय, डाॅ. वीके वर्मा, डा.ॅ पारस वैद्य, तेज प्रकाश शुक्ल, समीर तिवारी, अफजल हुसैन आदि ने रचनाओं से वातावरण को सरस कर दिया। संवाद