समूह की महिलाओं ने तैयार किया मशरूम संवाद
बस्ती। मशरूम की खेती महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता के साथ आर्थिक स्थिति के सुधार में एक नया जरिया भी बन गई है। जिले के अधिकांश विकास खंड़ों में महिलाएं मशरूम उत्पादन कर इससे अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर रही हैं।
प्रदेश सरकार की ओर से भी मशरूम उत्पादन के लिए किसानों को अनुदान और महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। जिले में 603 से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर मशरूम की खेती कर रही हैं। कप्तानगंज ब्लॉक के रैकवार में स्वयं सहायता समूह का संचालन कर रहीं महिलाओं ने बताया कि समूह की कई महिलाएं मशरूम की खेती कर स्वरोजगार कर रही हैं।
विभिन्न प्रकार के मशरूम अलग-अलग मौसम में उगाए जा सकते हैं जिससे आय का निरंतर स्रोत बना रहता है। उभाई स्वयं सहायता समूह की महिला दीप्ती बताती हैं कि इससे कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।
समूह की महिला सदस्य इस कारोबार से जुड़कर अपने परिवार का सहारा बनी हैं। अब मशरूम की खेती से सभी की आर्थिक दशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा हैं। बेमहरी में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी कई महिलाएं मशरूम उत्पादन कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उत्पादन के बाद इसका बाजार मिल जा रहा है। इससे बिक्री में आसानी हो रही है। सहालग में इसकी मांग बढ़ी है।