आदर्श रेलवे स्टेशन, मुंडेरवा में यात्री सुविधाओं का अभाव
मुंडेरवा (बस्ती )। आदर्श रेलवे स्टेशन घोषित हुए छह साल बीत जाने के बाद भी मुंडेरवा में यात्री सुविधाओं की कमी अब यात्रियों को खलने लगी है। प्लेटफार्म नंबर दो पर उगी झाड़ियों के चलते यात्रियों को ट्रेन के इंतजार में खड़े होने की जगह कम पड़ने लगी है जबकि कई बेंच भी टूट चुकी हैं। पीने के पानी की सुविधा तो है ही नहीं। रात में तो समूचे स्टेशन पर अंधेरा पसरा रहता है, जिससे आने-जाने वाली यात्री परेशान रहते हैं।
गोरखपुर-लखनऊ रेलखंड पर बस्ती और संतकबीरनगर के बीच मुंडेरवा सबसे अहम रेलवे स्टेशन है। मुंडेरवा को करीब डेढ़ साल पहले नगर पंचायत का दर्जा मिला है और यहां की चीनी मिल भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में इस स्टेशन पर हर दिन बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना होता है। लेकिन, मुंडेरवा रेलवे स्टेशन सुविधाओं की कमी से यात्रियों को हर दिन समस्या से दो-चार होना पड़ता है। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर लगे सीमेंट बेंच टूटे पड़े है। एक दो बैठने योग्य हैं तो उसके पास झाड़-झंखाड़ है। इस प्लेटफार्म पर पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। एक इंडिया मार्क हैंडपंप है, लेकिन वह लंबे समय से खराब पड़ा है। बिजली के खंभे तो लगे हैं, लेकिन उस पर लाइट कभी भी नहीं जलती है। जिसके चलते रात में सवारियों को काफी दिक्कतें होती है। इतना ही नहीं मुंडेरवा कस्बे से रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली सड़क पर कूड़े का ढेर लगा और उससे उठने वाली दुर्गंध के बीच से यात्रियों को आना-जाना पड़ता है। उपरीगामी पुल की सीढ़ियां उखड़ने लगी हैं। स्थानीय निवासी मार्तेंद्र प्रताप, छोटू चौधरी, हर्षित, अनूप भट्ट, शिवम, हृदयराम आदि ने बताया कि कोरोना के चले दो वर्ष तक ट्रेन नहीं चली। सुबह में गोरखपुर अयोध्या पैसेंजर और शाम को यही अयोध्या से गोरखपुर पैसेंजर ही दो मई से रुकने लगी है। स्टेशन पर कोई भी सुविधा नहीं है। वेटिंग रूम तो कभी खुलता ही नहीं है।
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इंडिया मार्का हैंडपंप खराब की सूचना संबंधित विभाग को दे दी गई है। जल्द ही बन जाएगा। प्लेटफार्म पर तमाम लोगों का आना-जाना होता है, उनमें से ही सीट तोड़ दी है। इसे भी जल्द ही ठीक करा दिया जाएगा। पेयजल आपूर्ति के लिए लगे पोस्ट की टोंटियां लोग खोलकर निकाल ले गए हैं।
विजय कुमार, स्टेशन अधीक्षक, मुंडेरवा