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Basti News: मर्ज से ज्यादा बाहरी दवा के पर्चे दे रहे तकलीफ

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बाहर और अंदर की लिखी दवा पर्ची दिखाता मरीज संवाद
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बस्ती। भले ही अस्पतालों में एक रुपये के पर्चे पर निशुल्क दवा और जांच आदि की व्यवस्था है लेकिन फिर भी बाहर की दवा लिखने पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। ओपीडी हो या फिर इमरजेंसी, सरकारी पर्चे पर बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। शुक्रवार को जिला अस्पताल में कई मरीज ऐसे मिले, जिन्हें बाहर की दवा लिखी गई थीं।
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मरीजों के अनुसार, पांच सौ रुपये से लेकर 16 सौ रुपये तक की दवा बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ी। हालात यह है कि मरीजों को मर्ज से ज्यादा दर्द बाहरी दवा के पर्चे दे रहे हैं। रमवापुर निवासी मानती ने बताया कि उन्हें सांस समेत लिवर आदि की समस्या है। ओपीडी के 14 नंबर कक्ष में दिखाने के बाद डॉक्टर ने अच्छी दवा होने की बात कहकर बाहर की दवा लिखी।
बाहर से खरीदकर लाए जिसमें 1600 रुपये खर्च करने पड़े। बाहर से इसलिए भी खरीद ली कि आराम मिल जाए बस। सदर ब्लॉक के मझौआ से आए नितिन ने बताया कि शरीर में खुजली और दाने निकल रहे थे, चमड़ी में भी इंफेक्शन था तो डॉक्टर को दिखाए, उन्होंने एक पर्ची अंदर तो दूसरी दवा की पर्ची बाहर की दी। मजबूर होकर बाहर से 500 रुपये की दवा लेनी पड़ी।
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इसी प्रकार राहुल और शिवराजी ने बताया कि उन्हें पेट में मरोड़ और बुखार की शिकायत थी तो फिजिशियन के पास गए। वहां से डॉक्टर ने दो पर्ची थमा दी। अंदर से दवा लेने के बाद बाहर से दवा लेने को कहा गया, इसके एवज में 418 रुपये खर्च करने पड़े।
यह महज बानगी है, रोजाना यहां यही खेल हो रहा है। इससे मरीज निशुल्क दवा व जांच की सुविधा न पाकर बाहर से दवा और जांच कराने को मजबूर हो जा रहे हैं। मरीज तीमारदारों ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में बाहर की दवा लिखने पर अंकुश नहीं लगा पा रहा। अस्पतालों में एक रुपये के पर्चे पर निशुल्क दवा व जांच आदि की व्यवस्था है, फिर भी ओपीडी हो या इमरजेंसी, सरकारी परचे पर बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं।
जिला अस्पताल में शुक्रवार को कई मरीज ऐसे मिले, जिन्हें बाहर की दवा लिखी गई थी। मरीजों के अनुसार, चार से पांच सौ रुपये की दवा बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ी। शुक्रवार को ओपीडी में 845 मरीजों ने ओपीडी में परामर्श लिया। मर्ज जाने बिना लिख दी जाती है जांच : जिला अस्पताल में चिकित्सकों की मनमानी जारी है। एसआईसी के निर्देश के बाद भी मरीजों को बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। सीने में हल्का दर्द होने के बाद चिकित्सीय सलाह लेने पहुंचे एक मरीज को 450 रुपये की दवा की पर्ची थमा दी।
इसी तरह अन्य मरीजों को खुलेआम बाहर की दवाएं लिखीं। बाहर की जांच भी धड़ल्ले से कराए जा रहे। जानकारों ने बताया कि ब्लड जांच, एक्स-रे भी सेंटरों के इशारे पर लिखी जाती है।
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