लगातार नीचे पारा, फसलों पर संकट
बस्ती। कड़ाके की ठंड से अब परेशानी बढ़ने लगी है। ठिठुरन कम न होने से फसलों में नुकसान होने लगा है। सोमवार को दोपहर मौसम साफ हुआ मगर गलन कम नहीं हुई। लगातार तापमान औसत से नीचे रहने से रबी की सभी फसलों को नुकसान होना तय है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय गेहूं की बढ़त का समय है परंतु कोहरे के चलते गेहूं की ग्रोथ प्रभावित हो रही है। धूप न होने से पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। बादल छंटने से पाला का खतरा बढं गया जिससे मिर्च, टमाटर, बैगन, सेम, पपीता जैसी सब्जियों-फलों के पौधों के पत्ते काले पड़ सकते हैं। गेहूं, सरसों, मटर-चना व अरहर की खेती करने वाले किसानों को पैदावार प्रभावित होने का डर सताने लगा है।
किसान ठिठुरन ज्यादा होने से फसलों की समय पर सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। सबसे ज्यादा संकट आलू की फसल पर है। जिन खेतों में आलू की फसल खोदाई के लिए तैयार खड़ी है। उन्हें अधिक सर्दी होने के कारण मजदूर नहीं मिल रहे हैं। वहीं अधर में फंसी फसल पर पाला का संकट उत्पन्न हो गया है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरबी सिंह के अनुसार फसलों की समय पर करें सिचाई पाला से फसलों को बचाने को किसान समय पर सिचाई करें। ताकि मिट्टी में हमेशा नमी बनी रहे। अगर पत्तों पर पाले का असर दिखाई देता है, तो तत्काल कृषि वैज्ञानिकों की राय लेकर दवा का छिड़काव करें जिससे फल सब्जियों के पौधों पर पाला का असर नहीं होगा। सूरज ढलने के बाद खेत की मेड़ पर आग जलाकर धुआं कर दें इससे भी पाले का असर कम होगा।